Israel–Iran conflict: खामेनेई की मौत की खबर से मचा हड़कंप, क्या महंगा होगा पेट्रोल-डीजल?

Picture of Deepak Mittal

Deepak Mittal

तेहरान/वॉशिंगटन/यरुशलम: अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बीच ईरान के सर्वोच्च नेता Ayatollah Ali Khamenei की मौत की खबर सामने आई है। ईरानी मीडिया की ओर से इसकी पुष्टि किए जाने के बाद वैश्विक स्तर पर तनाव और बढ़ गया है। इस घटनाक्रम ने खासतौर पर कच्चे तेल की कीमतों को लेकर बड़ी चिंता पैदा कर दी है।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ा खतरा

युद्ध के बीच Strait of Hormuz से गुजरने वाले तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित होने की खबर है। यह मार्ग बेहद अहम माना जाता है, क्योंकि दुनिया की कुल तेल खपत का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। यदि यहां लंबे समय तक रुकावट बनी रहती है, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है।

यह संकरा समुद्री मार्ग खाड़ी के प्रमुख तेल उत्पादक देशों—सऊदी अरब, इराक, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और कतर—को एशियाई बाजारों जैसे चीन, भारत, जापान और दक्षिण कोरिया से जोड़ता है। ऐसे में किसी भी तरह की बाधा का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ना तय माना जा रहा है।

ब्रेंट क्रूड सात महीने के उच्च स्तर पर

युद्ध की आशंकाओं के बीच अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड शुक्रवार को 72.87 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ, जो सात महीने का उच्चतम स्तर है। ईरान प्रतिदिन करीब 1.6 मिलियन बैरल कच्चा तेल निर्यात करता है, जिसमें से अधिकांश चीन को जाता है। सप्लाई प्रभावित होने की स्थिति में चीन को अन्य स्रोतों से तेल खरीदना पड़ सकता है, जिससे वैश्विक मांग और कीमतों में और तेजी आ सकती है।

90 डॉलर पार कर सकता है क्रूड?

Center for Strategic and International Studies के विश्लेषक क्लेटन सीगल के अनुसार, यदि ईरान टैंकर ट्रैफिक में व्यवधान डालता है तो कच्चे तेल की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जा सकती है। हालांकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के लिए जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद करना रणनीतिक रूप से नुकसानदायक होगा, क्योंकि इससे उसका खुद का निर्यात भी रुक जाएगा और उसके बड़े ग्राहक चीन पर असर पड़ेगा।

अमेरिका में भी बढ़ सकती हैं गैस की कीमतें

AAA के मुताबिक, पिछले सप्ताह अमेरिका में गैस की औसत कीमत 2.98 डॉलर प्रति गैलन दर्ज की गई थी। ताजा घटनाक्रम के बाद यह कीमत 3 डॉलर प्रति गैलन से ऊपर जा सकती है।

भारत पर क्या होगा असर?

भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। यदि वैश्विक बाजार में कच्चा तेल महंगा होता है, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि अंतिम फैसला सरकारी नीतियों, टैक्स स्ट्रक्चर और तेल कंपनियों की मूल्य समीक्षा पर निर्भर करेगा।

फिलहाल वैश्विक बाजार की नजर युद्ध के अगले घटनाक्रम और हॉर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति पर टिकी हुई है। यदि हालात जल्द सामान्य नहीं होते, तो दुनिया भर में ईंधन महंगा होना तय माना जा रहा है।

Deepak Mittal
Author: Deepak Mittal

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

October 2026
S M T W T F S
 123
45678910
11121314151617
18192021222324
25262728293031

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *