नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच एक नया मोड़ सामने आया है। खबर है कि Iran ने ड्रोन के जरिए Azerbaijan के स्वायत्त क्षेत्र Nakhchivan Autonomous Republic को निशाना बनाया है। इस घटना के बाद अजरबैजान सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए तेहरान से स्पष्टीकरण मांगा है और ईरान के राजदूत को तलब किया है।
अजरबैजान के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, ड्रोन हमले ईरान की सीमा से किए गए, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा हो गई है। मंत्रालय ने कहा कि इस तरह की घटनाएं दोनों देशों के रिश्तों पर नकारात्मक असर डाल सकती हैं और क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा सकती हैं।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान के समर्थन में था अजरबैजान
गौरतलब है कि भारत के Operation Sindoor के दौरान अजरबैजान ने खुलकर Pakistan का समर्थन किया था और इस्लामाबाद के प्रति सहानुभूति जताई थी। उस समय अजरबैजान के राजदूत Khazar Farhadov ने कहा था कि उनका देश संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के आधार पर कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान के साथ खड़ा है।
तुर्की-अजरबैजान-पाकिस्तान की नजदीकी
मिडिल ईस्ट और कॉकस क्षेत्र की राजनीति में Turkey, अजरबैजान और पाकिस्तान के बीच घनिष्ठ संबंध माने जाते हैं। तुर्की और अजरबैजान अक्सर “वन नेशन–टू स्टेट” की नीति का जिक्र करते हैं, क्योंकि दोनों देशों की भाषा, संस्कृति और खानपान में काफी समानता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान और अजरबैजान के रिश्ते 2020 में Armenia के साथ युद्ध के दौरान और मजबूत हुए, जब पाकिस्तान ने खुले तौर पर अजरबैजान का समर्थन किया था।
भारत विरोधी गतिविधियों का भी आरोप
जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान और तुर्की ने अजरबैजान में भारत विरोधी मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने की भी कोशिश की। जनवरी 2026 में Baku में “भारत में सिखों और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ नस्लवाद और हिंसा” विषय पर एक सम्मेलन आयोजित किया गया था, जिसे बाकू इनिशिएटिव ग्रुप ने आयोजित किया था।
फिलहाल ईरान के कथित ड्रोन हमले के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। अजरबैजान ने मामले की कड़ी जांच और ईरान से स्पष्ट जवाब की मांग की है।
Author: Deepak Mittal









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