भारतमाला घोटाले की जांच तेज: रायपुर और महासमुंद में 9 ठिकानों पर ED की छापेमारी

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छत्तीसगढ़ में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार को भारतमाला परियोजना के तहत रायपुर-विशाखापत्तनम आर्थिक कॉरिडोर के लिए भूमि अधिग्रहण में मुआवजा भुगतान से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच के सिलसिले में बड़ी कार्रवाई की है।

ईडी के रायपुर जोनल कार्यालय द्वारा रायपुर और महासमुंद जिलों में कुल 9 परिसरों पर तलाशी और जब्ती की कार्रवाई की जा रही है। ईडी की यह कार्रवाई उन आरोपों की जांच के तहत की जा रही है, जिनमें भूमि अधिग्रहण के दौरान मुआवजा भुगतान में गड़बड़ियों की आशंका जताई गई है। तलाशी अभियान के दायरे में हरमीत सिंह खनूजा, उनके सहयोगियों, संबंधित सरकारी अधिकारियों और भूमि मालिकों से जुड़े ठिकाने शामिल हैं।

ईडी की ओर से जारी प्रेस नोट में बताया गया, “ईडी, रायपुर जोनल कार्यालय द्वारा छत्तीसगढ़ के रायपुर और महासमुंद में कुल नौ परिसरों पर तलाशी और जब्ती की कार्रवाई की जा रही है। यह कार्रवाई भारतमाला परियोजना के तहत रायपुर-विशाखापत्तनम आर्थिक कॉरिडोर के लिए भूमि अधिग्रहण में मुआवजा भुगतान से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच के संबंध में की जा रही है।”

बता दें कि भारतमाला परियोजना भारत सरकार की एक परियोजना है। इसका मकसद 50 कॉरिडोर (अभी के छह से) करके 550 जिला मुख्यालयों (अभी के 300 से) को कम से कम 4-लेन हाईवे से जोड़ना और 24 लॉजिस्टिक्स पार्क, कुल 8,000 किमी के 66 इंटर-कॉरिडोर, कुल 7,500 किमी के 116 फीडर मार्गों को जोड़कर 80 प्रतिशत माल ढुलाई (अभी 40 प्रतिशत) को नेशनल हाईवे पर लाना था।

इस पूरे मामले की जांच में यह सामने आया कि जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया में 43 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का खुलासा हुआ। जमीन के टुकड़ों को बांटकर और रिकॉर्ड में हेराफेरी करके, नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) को कुल 78 करोड़ रुपए का गलत भुगतान दिखाया गया।

एसडीएम, पटवारियों और जमीन माफियाओं के एक सिंडिकेट ने पुरानी तारीख के दस्तावेजों के जरिए यह धोखा किया। आरोपियों में पांच अधिकारी शामिल हैं, जिनमें निर्भय कुमार साहू भी शामिल हैं, जिन पर 43.18 करोड़ रुपए से ज्यादा के गबन का आरोप है। अभनपुर के नायकबंधा और उर्ला गांवों में जमीन माफियाओं ने राजस्व अधिकारियों के साथ मिलकर जमीन को 159 प्लॉट में बांट दिया, जिससे उसका मूल्यांकन 29.5 करोड़ रुपए से बढ़कर 78 करोड़ रुपए हो गया। अभानपुर बेल्ट में 9.38 किलोमीटर के हिस्से के लिए मुआवजा शुरू में 324 करोड़ रुपए तय किया गया था, जिसमें से 246 करोड़ रुपए बांट दिए गए हैं, जबकि 78 करोड़ रुपए अभी भी रोके गए हैं।

राज्य विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान,विपक्ष के नेता डॉ. चरणदास महंत ने भारतमाला प्रोजेक्ट पर चिंता जताई और सीबीआई जांच की मांग की। राजस्व मंत्री टैंक राम वर्मा ने अनियमितताओं को स्वीकार किया और बताया कि अगस्त 2022 में शुरू की गई रायपुर कलेक्टर की जांच में धोखाधड़ी की पुष्टि हुई है। जांच में अधिकारियों पर मालिकाना हक ट्रांसफर में हेराफेरी करने और मुआवज़े के दावों को बढ़ाने का आरोप लगा। नतीजतन, सरकार ने कई अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया, जिनमें नायब तहसीलदार गोबरा नवापारा लखेश्वर प्रसाद किरण और पटवारी जितेंद्र प्रसाद साहू, दिनेश पटेल और लेखराम देवांगन शामिल हैं।

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Author: Deepak Mittal

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