नई दिल्ली/रायपुर:भारत की संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना से जुड़ी एक ऐतिहासिक घटना ने सभी देशवासियों को गौरवान्वित कर दिया है। भगवान बुद्ध के पिपरहवा अवशेष, जो 127 वर्षों से विदेश में थे, अब भारत वापस लौट आए हैं। यह धरोहर उस समय वापस आई जब इनकी नीलामी की तैयारी चल रही थी।
इस महत्वपूर्ण वापसी पर कृषि मंत्री राम विचार नेताम ने इसे “भारत की आत्मा की घर वापसी” करार देते हुए कहा, “यह केवल सांस्कृतिक वस्तु नहीं, हमारी सभ्यता की पहचान है।”
क्या हैं पिपरहवा अवशेष?
पिपरहवा, उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर ज़िले का एक ऐतिहासिक स्थल है, जिसे भगवान बुद्ध से जुड़ा हुआ माना जाता है।
वर्ष 1898 में ब्रिटिश पुरातत्वविद विलियम क्लॉक्स द्वारा की गई खुदाई में यहां से धातु के कलश और अस्थियाँ मिली थीं। पालि भाषा में उत्कीर्ण अभिलेखों से पुष्टि हुई कि ये अवशेष भगवान बुद्ध के ही हैं।
बाद में ये अवशेष विदेशों में संग्रहालयों और निजी संग्राहकों के हाथों में चले गए। हाल ही में इनमें से कुछ अवशेषों की नीलामी की प्रक्रिया शुरू हो गई थी।
भारत सरकार ने कैसे की वापसी संभव?
जैसे ही नीलामी की खबर सामने आई, भारत सरकार सक्रिय हुई।
विदेश मंत्रालय और संस्कृति मंत्रालय के समन्वय से राजनयिक और कानूनी प्रयास किए गए। मई 2024 में भारत सरकार ने कड़ा विरोध दर्ज कराया और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा का मुद्दा उठाया।
इन प्रयासों के बाद अमूल्य बौद्ध अवशेषों को भारत को वापस सौंप दिया गया।
मंत्री नेताम का बयान: “यह भारत की आत्मा की वापसी है”
राम विचार नेताम ने कहा:
“यह केवल ऐतिहासिक अवशेषों की वापसी नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक चेतना, गौरव और अस्मिता की पुनर्प्रतिष्ठा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत न केवल अपनी धरोहरें बचा रहा है, बल्कि उन्हें वैश्विक पहचान भी दिला रहा है।”
युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा
मंत्री नेताम ने कहा कि यह घटना युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने में मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने पिपरहवा अवशेषों की वापसी को “संस्कृति के राष्ट्रवाद का जीवंत उदाहरण” बताया।
Author: Deepak Mittal










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