Lifestyle: बदलती जीवनशैली और बढ़ती स्वास्थ्य जागरूकता के बीच सात्विक आहार एक बार फिर लोगों की पसंद बनता जा रहा है। सात्विक भोजन का अर्थ है ऐसा खाना जो शरीर और मन दोनों को शुद्ध, हल्का और ऊर्जा से भरपूर बनाए। यह सुपाच्य होता है और इसे खाने से शरीर में ताजगी, स्फूर्ति और मानसिक शांति बनी रहती है।
सात्विक भोजन में ताजे फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज और प्राकृतिक मसालों का प्रयोग किया जाता है। यह आहार न केवल सामान्य जीवनशैली में उपयोगी है, बल्कि व्रत और डिटॉक्स डाइट के दौरान भी इसे विशेष रूप से अपनाया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार सात्विक भोजन से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर रहता है, पाचन तंत्र मजबूत होता है और शरीर में हल्कापन महसूस होता है।
व्रत में समा की खिचड़ी बनी लोकप्रिय विकल्प
व्रत और सात्विक डाइट में सबसे लोकप्रिय व्यंजन के रूप में समा के चावल की खिचड़ी को देखा जाता है। समा के चावल को ब्राउन राइस या साबुत अनाज के विकल्प के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है। यह हल्का होने के साथ-साथ पोषण से भरपूर होता है।
समा की खिचड़ी बनाने की विधि भी सरल है। पहले समा के चावल को धोकर अलग रखा जाता है। फिर कढ़ाई में घी गरम कर जीरा और हरी मिर्च का तड़का लगाया जाता है। इसके बाद कटे हुए आलू और मूंगफली डालकर हल्का भूनते हैं। अंत में समा के चावल और पानी डालकर ढककर पकाया जाता है। कुछ ही समय में स्वादिष्ट और पौष्टिक खिचड़ी तैयार हो जाती है।
हल्की, सुपाच्य और ऊर्जा से भरपूर
समा की खिचड़ी का स्वाद हल्का और सुपाच्य होता है। इसे खाने से पेट भरा हुआ महसूस होता है, लेकिन भारीपन नहीं होता। घी, मूंगफली और आलू के कारण शरीर को जरूरी ऊर्जा और प्रोटीन भी मिलते हैं। यही वजह है कि लंबे समय तक उपवास रखने वाले लोगों के लिए यह आदर्श भोजन माना जाता है।
सात्विक आहार के अन्य लाभ
सात्विक डाइट में ताजी सब्जियां, हल्की दालें, फल और प्राकृतिक मसाले जैसे हल्दी, हींग, धनिया और हरी मिर्च शामिल किए जाते हैं। नियमित रूप से सात्विक भोजन अपनाने से पाचन शक्ति बेहतर होती है, शरीर में विषैले तत्व कम होते हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रहती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सात्विक भोजन केवल व्रत तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे रोजमर्रा की जिंदगी में भी शामिल किया जा सकता है।
Author: Deepak Mittal










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