रायपुर।
छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन, विपक्ष ने हसदेव अरण्य में पेड़ों की कटाई को लेकर सरकार को घेरते हुए तीखा विरोध जताया। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और कांग्रेस के तमाम विधायकों ने इस मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव के जरिए चर्चा कराने की मांग की। लेकिन जब स्पीकर डॉ. रमन सिंह ने स्थगन को अस्वीकार किया, तो सदन में पक्ष-विपक्ष के बीच जोरदार तकरार हुई और कार्यवाही को 5 मिनट के लिए स्थगित करना पड़ा।
“जंगल उजड़ रहा, सरकार उद्योगपति के साथ खड़ी” – कांग्रेस का आरोप
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा:
“कोयला खनन के नाम पर हसदेव अरण्य जैसे जंगल को उजाड़ा जा रहा है। ग्राम सभा की स्वीकृति नहीं ली गई। कांग्रेस इसका तीव्र विरोध करती है।”
वहीं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार पर पेसा कानून, एनजीटी और वन अधिकार कानून के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कहा:
“तमनार में सरकार नहीं, सिर्फ उद्योगपति की मनमानी चल रही है। एक तरफ ‘एक पेड़ माँ के नाम’ का नारा, और दूसरी तरफ पूरा जंगल बाप के नाम किया जा रहा है!”
विधायकों की ज़ुबानी: जंगल कटाई से आदिवासी नाराज, पुलिस बर्बर
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विद्यावती सिदार: “विरोध करने पर पुलिस ने बर्बरतापूर्वक हिरासत में लिया।”
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लालजीत राठिया: “फर्जी प्रस्तावों से जंगल काटे जा रहे हैं।”
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अनिला भेंड़िया: “जंगल के नाम पर आदिवासियों का अस्तित्व मिटाया जा रहा।”
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द्वारिका यादव: “एक उद्योगपति को लाभ पहुंचाने के लिए पूरा तमनार उजाड़ा जा रहा है।”
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देवेंद्र यादव: “आज पर्यावरण बर्बाद हो रहा है, आदिवासी समाज आक्रोशित है।”
“यह सरकार की तानाशाही है” – विक्रम उसेंडी
कांग्रेस विधायक विक्रम उसेंडी ने आरोप लगाया कि प्रशासन तानाशाही रवैया अपना रहा है। जंगलों को बचाने की बजाय, पुलिस बल पेड़ों की कटाई सुनिश्चित करने में लगा है।
अब क्या होगा?
विपक्ष की मांग है कि इस विषय पर सदन में विस्तृत चर्चा कराई जाए और तमनार में खनन गतिविधियों को तत्काल प्रभाव से रोका जाए। हालांकि सरकार की ओर से अभी तक कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं आई है।
Author: Deepak Mittal










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