नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) के पट्टे वाले क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अवैध कोयला खनन और चोरी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 100.44 करोड़ रुपये की संपत्तियां अस्थायी रूप से जब्त (अटैच) की हैं।
एजेंसी के मुताबिक, अवैध खनन गतिविधियां अनूप मजी उर्फ ‘लाला’ के नेतृत्व वाले गिरोह द्वारा संचालित की जा रही थीं। यह गिरोह अवैध खुदाई और बड़े पैमाने पर कोयला चोरी में संलिप्त था। जांच में यह भी सामने आया कि स्थानीय प्रशासन की कथित मिलीभगत से अवैध रूप से निकाले गए कोयले को पश्चिम बंगाल के विभिन्न कारखानों तक पहुंचाया जाता था।
‘लाला पैड’ से होता था फर्जी परिवहन
ईडी की जांच में खुलासा हुआ कि गिरोह ने अवैध परिवहन चालान प्रणाली विकसित की थी, जिसे आमतौर पर “लाला पैड” कहा जाता था। यह फर्जी चालान काल्पनिक फर्मों के नाम पर जारी किए जाते थे और टैक्स इनवॉइस की तरह इस्तेमाल होते थे।
ट्रांसपोर्टर को 10 या 20 रुपये का नोट दिया जाता था, जिसे वाहन की नंबर प्लेट के पास पकड़कर फोटो खींची जाती और सिंडिकेट संचालक को भेजी जाती। इसके बाद वह फोटो व्हाट्सएप के जरिए मार्ग में तैनात संबंधित अधिकारियों तक भेजी जाती, ताकि ट्रकों को रोका न जाए।
2,742 करोड़ रुपये की अवैध कमाई का दावा
ईडी के अनुसार, सिंडिकेट के रिकॉर्ड से संकेत मिलता है कि गिरोह ने अपराध से करीब 2,742 करोड़ रुपये अर्जित किए। पीएमएलए जांच के दौरान जब्त रजिस्टर, डिजिटल रिकॉर्ड, टैली डेटा और व्हाट्सएप चैट के विश्लेषण में संगठित नकद लेनदेन और हवाला नेटवर्क के जरिए धन के ट्रांसफर का खुलासा हुआ।
एजेंसी ने बताया कि हवाला लेनदेन में 10 रुपये या अन्य मूल्यवर्ग के नोट का सीरियल नंबर प्रमाणीकरण कोड के रूप में इस्तेमाल किया जाता था। सत्यापन के बाद बिना किसी औपचारिक बैंकिंग रिकॉर्ड के नकद राशि सौंप दी जाती थी, जिससे नियामक निगरानी से बचा जा सके।
कंपनियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
जांच में यह भी पाया गया कि इस्पात और लौह क्षेत्र की कुछ लाभार्थी कंपनियों ने अवैध रूप से निकाले गए कोयले को नकद में खरीदा। अटैच की गई संपत्तियों में अचल संपत्ति, फिक्स्ड डिपॉजिट और म्यूचुअल फंड निवेश शामिल हैं, जो शाकंभरी इस्पात एंड पावर लिमिटेड और गगन फेरोटेक लिमिटेड जैसी कंपनियों के नाम पर हैं।
ईडी के मुताबिक, इस नवीनतम कुर्की के बाद मामले में अब तक कुल 322.71 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की जा चुकी है। इससे पहले 8 जनवरी को एजेंसी ने कोलकाता और दिल्ली में 10 ठिकानों पर तलाशी अभियान भी चलाया था।
एजेंसी का कहना है कि मामले में कई स्तरों पर जटिल वित्तीय लेनदेन किए गए, जिनका उद्देश्य अपराध से अर्जित धन को छिपाना और वैध दिखाना था। जांच जारी है।
Author: Deepak Mittal










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