Lifestyle: आज की बदलती जीवनशैली के कारण बड़ी संख्या में लोग डायबिटीज और प्री-डायबिटीज की समस्या से जूझ रहे हैं। जंक फूड का अधिक सेवन, तनाव, शारीरिक गतिविधि की कमी, नींद पूरी न होना और मोटापा इस बीमारी के प्रमुख कारण माने जाते हैं। डॉक्टरों के अनुसार, महिलाओं की तुलना में पुरुषों में डायबिटीज का खतरा अधिक देखा जा रहा है, जिसकी वजह काम का तनाव, थकान और अनियमित दिनचर्या है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर डायबिटीज के शुरुआती लक्षणों को समय रहते पहचान लिया जाए, तो बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकता है। सही समय पर जांच और लाइफस्टाइल में बदलाव से प्री-डायबिटीज को कंट्रोल किया जा सकता है।
बार-बार पेशाब आना और ज्यादा प्यास लगना
प्री-डायबिटीज और डायबिटीज का सबसे शुरुआती लक्षण बार-बार पेशाब आना है। खून में ग्लूकोज का स्तर बढ़ने से किडनी पर दबाव पड़ता है, जिससे ज्यादा मात्रा में पेशाब बनने लगता है। इसके कारण शरीर में पानी की कमी हो जाती है और बार-बार प्यास लगने लगती है, खासतौर पर रात के समय।
लगातार थकान महसूस होना
पर्याप्त आराम के बावजूद थकान महसूस होना भी एक अहम संकेत है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि शरीर की कोशिकाएं ग्लूकोज का सही तरीके से उपयोग नहीं कर पातीं, जिससे एनर्जी की कमी महसूस होती है।
बिना वजह वजन कम होना और ज्यादा भूख लगना
इंसुलिन की कमी के कारण शरीर एनर्जी के लिए फैट और मांसपेशियों को तोड़ने लगता है, जिससे वजन घटने लगता है। वहीं, पेट भरकर खाने के बाद भी बार-बार भूख लगना भी प्री-डायबिटीज का लक्षण हो सकता है।
धुंधला दिखना और घाव देर से भरना
हाई ब्लड शुगर लेवल आंखों पर असर डालता है, जिससे नजर धुंधली हो सकती है। इसके अलावा, डायबिटीज में शरीर की इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाती है, जिससे चोट या घाव जल्दी ठीक नहीं होते।
हाथ-पैरों में सुन्नपन
ब्लड शुगर बढ़ने से नसों को नुकसान पहुंच सकता है। इसका असर हाथों और पैरों में झनझनाहट या सुन्नपन के रूप में दिखाई देता है।
डॉक्टरों की सलाह है कि अगर इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और ब्लड शुगर की जांच कराएं। समय रहते पहचान और सही इलाज से न केवल डायबिटीज को कंट्रोल किया जा सकता है, बल्कि शरीर को होने वाले गंभीर नुकसान से भी बचाया जा सकता है।
Author: Deepak Mittal










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