50 साल से कम उम्र में पार्टी अध्यक्ष बनने वाले चुनिंदा नेताओं में दर्ज होगा नाम
नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन के अगले साल की शुरुआत में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की संभावनाएं मजबूत होती दिख रही हैं। यदि जेपी नड्डा के बाद नितिन नवीन को यह जिम्मेदारी सौंपी जाती है, तो वह भाजपा के संस्थापक नेताओं अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी की विशेष श्रेणी में शामिल हो जाएंगे।
दरअसल, वाजपेयी और आडवाणी दोनों ही भाजपा की पूर्ववर्ती पार्टी भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष रह चुके हैं और खास बात यह है कि दोनों ने 50 साल से कम उम्र में पार्टी की कमान संभाली थी। वाजपेयी जब पहली बार जनसंघ अध्यक्ष बने थे तब उनकी उम्र 44 साल थी, जबकि आडवाणी 46 साल की उम्र में अध्यक्ष बने थे। यदि नितिन नवीन 2026 की शुरुआत में भाजपा अध्यक्ष बनते हैं, तो उनकी उम्र करीब 45 साल होगी, जिससे वह भी इसी ऐतिहासिक लीग में शामिल हो जाएंगे।
50 साल से कम उम्र में अध्यक्ष बनने वाले चुनिंदा नेता
जनसंघ और भाजपा के इतिहास पर नजर डालें तो श्यामा प्रसाद मुखर्जी से लेकर जेपी नड्डा तक कुल 21 नेता पार्टी अध्यक्ष रह चुके हैं। इनमें से केवल 5 ऐसे नेता हैं, जो पहली बार अध्यक्ष बने तब उनकी उम्र 50 साल से कम थी।
इनमें शामिल हैं—
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अटल बिहारी वाजपेयी (44 वर्ष)
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लालकृष्ण आडवाणी (46 वर्ष)
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बलराज मधोक (46 वर्ष)
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बच्छराज व्यास (49 वर्ष)
यदि नितिन नवीन मई 2025 से पहले अध्यक्ष बनते हैं, तो वह भी इस चुनिंदा सूची का हिस्सा बन जाएंगे।
50 की उम्र में बने थे मुखर्जी और अमित शाह
जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी और भाजपा के सबसे सफल अध्यक्षों में गिने जाने वाले अमित शाह, दोनों ही जब पहली बार अध्यक्ष बने थे तब उनकी उम्र 50 साल थी। वहीं भाजपा के अब तक बने 11 अध्यक्षों में से 8 ऐसे रहे हैं, जो पहली बार 50 से 60 साल की उम्र के बीच अध्यक्ष बने।
सबसे बुजुर्ग अध्यक्ष और विवाद
भाजपा के इतिहास में सबसे बुजुर्ग अध्यक्ष कुशाभाऊ ठाकरे रहे, जिन्हें 76 साल की उम्र में पार्टी प्रमुख बनाया गया था। वहीं 61 साल की उम्र में अध्यक्ष बने बंगारू लक्ष्मण का कार्यकाल स्टिंग ऑपरेशन के कारण विवादों में घिर गया, जिसके बाद उनका राजनीतिक पतन हो गया।
नितिन नवीन की संभावित ताजपोशी का महत्व
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि नितिन नवीन को कम उम्र में भाजपा अध्यक्ष बनाया जाता है, तो यह पार्टी में नई पीढ़ी के नेतृत्व को आगे बढ़ाने का बड़ा संकेत होगा। साथ ही, यह फैसला उन्हें अटल-आडवाणी जैसे दिग्गज नेताओं की ऐतिहासिक परंपरा से जोड़ देगा, जो भाजपा और जनसंघ के संगठनात्मक इतिहास में खास स्थान रखते हैं।
Author: Deepak Mittal










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