नई दिल्ली: आई-पैक (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) से जुड़ी छापेमारी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान ईडी की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दावा किया कि मुख्यमंत्री स्वयं इस मामले में आरोपी हैं और पश्चिम बंगाल के डीजीपी ने इसमें सहयोगी की भूमिका निभाई।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि छापेमारी के दौरान ईडी अधिकारियों को कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जानकारी मिली थी, जो जांच के दायरे में आते हैं। उन्होंने कहा कि स्थानीय पुलिस को छापेमारी की सूचना पहले ही दी गई थी, इसके बावजूद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कथित रूप से गैरकानूनी तरीके से छापे वाली जगह पर पहुंचीं और दस्तावेज अपने साथ ले गईं। उन्होंने अदालत से मांग की कि जांच में बाधा डालने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ा आदेश पारित किया जाए, ताकि यह एक नजीर बन सके।
ईडी का पक्ष रखते हुए मेहता ने कहा कि छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री परिसर में दाखिल हुईं और कथित तौर पर सभी डिजिटल डिवाइस तथा तीन आपत्तिजनक दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री दोपहर करीब 12:15 बजे वहां से चली गईं। ईडी ने इसे जांच में सीधा हस्तक्षेप और चोरी की कार्रवाई बताया।
मामले में अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की। उन्होंने कहा कि एफआईआर के लिए संज्ञेय अपराध का प्रथम दृष्टया मामला होना पर्याप्त है और यह मामला चोरी व लूट की श्रेणी में आता है। इसके साथ ही उन्होंने पश्चिम बंगाल पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए इस पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की।
वहीं, तृणमूल कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने ईडी के आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि आई-पैक के पास पार्टी का चुनावी और गोपनीय डेटा मौजूद है और चुनाव के दौरान ईडी की छापेमारी पर सवाल उठाए। सिब्बल ने तर्क दिया कि कोयला घोटाले में आखिरी बयान फरवरी 2024 में दर्ज किया गया था, फिर चुनाव के बीच अचानक कार्रवाई क्यों की गई।
कपिल सिब्बल ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर लगाए गए दस्तावेज चोरी के आरोप निराधार हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री केवल अपना लैपटॉप और आईफोन ही अपने साथ लेकर गई थीं, न कि ईडी से जुड़े अन्य डिवाइस या दस्तावेज।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने लंच के बाद दोबारा सुनवाई करने की बात कही है।
Author: Deepak Mittal










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