मप्र के उज्जैन में बाबा महाकाल पर अब भारी फूलमाला नहीं चढ़ेंगी

Picture of Deepak Mittal

Deepak Mittal

प्रशासक ने 01 जनवरी 2026 से लगाया प्रतिबंधउज्जैन, 10 दिसम्बर । मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान महाकालेश्वर के मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा लाई जाने वाली भारी-भरकम फूलमाला (अजगर माला) और मुण्डमाल आगामी एक जनवरी 2026 से शिवलिंग पर नहीं चढ़ाई जाएंगी।

महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति ने इन पर प्रतिबंध लगा दिया है। एएसआई और जीएसआई की गाइड लाइन का ध्यान रखते हुए करीब 10 किलो से अधिक वजनी मालाओं पर शिवलिंग क्षरण रोकने के लिए मंदिर समिति द्वारा यह फैसला लिया गया है। महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के प्रशासक प्रथम कौशिक ने बुधवार को जानकारी देते हुए बताया कि ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं के द्वारा लाई जाने वाली बड़ी माला, जिसे अजगर माला कहा जाता है, को भगवान महाकाल को अर्पित करने पर रोक लगा दी है।

आगामी नए वर्ष के पहले दिन से इसे पूर्णतः प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। इसके लिए अभी महाकाल मंदिर परिसर में उद्घोष हो रहा है कि भगवान के लिए अजगर माला नहीं खरीदें। साथ ही कक्ष से भक्तों को नए नियम की जानकारी देने के लिए लगातार उद्घोषणा भी की जा रही है। मंदिर के आसपास फूल प्रसाद की दुकान संचालित करने वाले व्यवसायियों को मंदिर समिति ने बता दिया है कि फूलों की भारी व बड़ी माला न तो बनाए और न ही विक्रय करें। उन्होंने कहा कि बाबा महाकाल का मंदिर समिति की ओर से ही श्रृंगार किया जा सकेगा।

गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय ने ज्योतिर्लिंग भगवान महाकाल के क्षरण की जांच तथा उसे रोकने के उपाय करने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) तथा भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) की टीम गठित की थी। विशेषज्ञों ने ज्योतिर्लिंग की सुरक्षित रखने के लिए कई सुझाव दिए। इसमें एक सुझाव भगवान महाकाल को फूलों की छोटी माला तथा समिति मात्रा में फूल अर्पण का था। महाकाल मंदिर परिसर में स्थित दुकानों पर अजगर मालाएं 500 से 2100 रुपये तक में बिकती हैं। श्रद्धालु इन मालाओं को खरीद कर शिवलिंग को अर्पित कर रहे थे। भक्त पुजारी को देते और पुजारी भगवान महाकाल को पहना देते थे। ये माला फूलों की मोटी व बड़ी माला होती है, जिनका 10 से 15 किलो तक होता था।

मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि महाकाल मंदिर के शिवलिंग पर चढ़ने वाले भारी अजगर माला पर आगामी एक जनवरी से प्रतिबंधित कर दिया है। नया नियम लागू होने के बाद मंदिर के विभिन्न द्वारों पर तैनात गार्ड भक्तों द्वारा भगवान को अर्पण करने के लिए लाई जा रही पूजन सामग्री की जांच करेंगे। बड़ी व भारी फूल माला को गेट पर ही अलग रखवा दिया जाएगा।

बाबा महाकाल ने भस्म आरती के दौरान गणेश स्वरूप में दिए भक्तों को दर्शन

इधर, बुधवार को तड़के भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल का त्रिपुंड और भस्म रमाकर श्री गणेश स्वरूप मे विशेष श्रृंगार किया गया। इस दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। उन्होंने भस्म आरती में बाबा महाकाल के आलोकिक श्रृंगार के दर्शन किए। इस दौरान जय श्री महाकाल के जयघोष से पूरा मंदिर परिसर गुंजायमान हो गया।

मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान महाकालेश्वर के मंदिर में पौष माह कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि पर बुधवार अलसुबह 4 बजे भस्म आरती हुई। इस दौरान वीरभद्र जी से आज्ञा लेकर मंदिर के पट खुलते ही पण्डे पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित सभी भगवान की प्रतिमाओं का पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक दूध, दही, घी, शक्कर पंचामृत और फलों के रस से किया गया। पूजन के दौरान प्रथम घंटाल बजाकर हरि ओम का जल अर्पित किया गया। पुजारियों और पुरोहितों ने इस दौरान बाबा महाकाल का आकर्षक स्वरूप मे श्रृंगार कर कपूर आरती के बाद बाबा महाकाल को नवीन मुकुट धारण कराया गया। इसके बाद महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल के शिवलिंग पर भस्म अर्पित की गयी। खास बात यह रही कि बाबा महाकाल का त्रिपुंड और भस्म रमाकर श्री गणेश स्वरूप में श्रृंगार किया गया था। बाबा महाकाल के इन दिव्य रूप का सैकड़ों भक्तों ने दर्शन लाभ लिया।

Deepak Mittal
Author: Deepak Mittal

Leave a Comment

February 2026
S M T W T F S
1234567
891011121314
15161718192021
22232425262728

Leave a Comment