देश में कुत्ता काटने की बढ़ती घटनाओं और सार्वजनिक स्थानों पर आम लोगों की सुरक्षा
सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने सख्त कदम उठाया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद अब नगर निगमों के साथ-साथ पंचायत निकायों को भी सीधे जवाबदेह बना दिया गया है।
पहली बार यह व्यवस्था की गई है कि सभी जिले को हर महीने रिपोर्ट देनी होगी कि कहां-कहां से कितनी संख्या में आवारा कुत्तों को हटाया गया और इस काम में कितने कर्मचारियों की तैनाती की गई है। रिपोर्ट की समीक्षा केंद्र सरकार करेगी। यह भी देखा जाएगा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश और निर्धारित मानक प्रक्रिया का कितना पालन हुआ।
बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि पशु कल्याण और मानव जीवन दोनों को बराबर महत्व दिया जाएगा, लेकिन किसी संकट की स्थिति में प्राथमिकता मनुष्य की सुरक्षा होगी।नई व्यवस्था में नगर निगमों एवं पंचायत निकायों को जवाबदेह इकाई घोषित करते हुए लापरवाही की जिम्मेदारी भी तय कर दी है।
सरकार ने स्कूल-कालेज, अस्पताल, सरकारी कार्यालय, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, बाजार और अन्य भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों को संवेदनशील माना है। इन जगहों से आवारा कुत्तों को हटाने की जिम्मेदारी स्थानीय निकायों की होगी। किसी संस्था या कालोनी को कुत्तों को अपने परिसर में रहने की छूट नहीं दी जा सकती। कहीं से खतरे की शिकायत आने पर प्रशासन को तुरंत कार्रवाई करनी होगी।
बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि कुत्तों को हटाने की प्रक्रिया मानवीय तरीके से होनी चाहिए। किंतु उन्हें वापस ऐसे इलाकों में न छोड़ा जाए जहां लोगों की आवाजाही अधिक हो। इससे पहले कई बार कुत्तों को पकड़कर दूर छोड़ दिया जाता था, लेकिन वे कुछ समय बाद फिर उसी इलाके में लौट आते थे।
Author: Deepak Mittal









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