सीमेंट चोरी से जीएसटी घोटाले तक – शशिभूषण शुक्ला फिर विवादों में”
“शशिभूषण शुक्ला पर पुराने फर्जीवाड़े की जांच पूरी, अब जीएसटी चोरी का नया मामला”
“नुवोको विस्टास घोटाले में सीएनएफ दुर्गा कैरियर का मालिक शशिभूषण शुक्ला बना मुख्य किरदार”
बालोद थाने में पहले से दर्ज है धोखाधड़ी और जालसाजी के गंभीर मामले, अब नुवोको विस्टास कंपनी के साथ कर रहा करोड़ों की जीएसटी हेराफेरी!
रायपुर/बालोद/बलौदा बाजार। नुवोको विस्टास कॉर्पोरेशन लिमिटेड से जुड़े जीएसटी चोरी के बड़े मामले में अब सीएनएफ दुर्गा कैरियर बलौदा बाजार और उसके मालिक शशिभूषण शुक्ला का नाम प्रमुख रूप से सामने आया है। बताया जा रहा है कि कंपनी और शशिभूषण शुक्ला के बीच की सांठगांठ के कारण राज्य सरकार को भारी राजस्व नुकसान पहुंचाया गया है।
शशिभूषण शुक्ला का विवादों से पुराना नाता रहा है। बालोद थाने में उनके खिलाफ पहले से ही सीमेंट चोरी और जालसाजी के मामलों में एफआईआर दर्ज है, जो आईपीसी की धारा 406, 408, 420, 467, 468, 471 के तहत दर्ज की गई थी। जांच के दौरान एक ही दस्तावेज की ओरिजनल और फोटो कॉपी में भिन्नता पाई गई, साथ ही हस्तलिपि विशेषज्ञ (क्यूडी शाखा) द्वारा कराई गई जांच में करीब 68 हस्ताक्षर फर्जी पाए गए।

फर्जी दस्तावेजों का खेल और जीएसटी में गड़बड़ी
सूत्रों के मुताबिक, शशिभूषण शुक्ला द्वारा सीमेंट चोरी के पुराने मामलों में भी फर्जी दस्तावेज और जाली हस्ताक्षर का सहारा लेकर बचाव किया गया था। अब वही तरीका जीएसटी चोरी के नए मामले में अपनाए जाने की आशंका जताई जा रही है।
जीएसटी विशेषज्ञों के अनुसार, कंपनी द्वारा अपने सीएनएफ (कैरीइंग एंड फॉरवर्डिंग एजेंट) के माध्यम से सीमेंट के बिल बेचे जाते हैं, जिन्हें आगे ठेकेदारों को बेचा जाता है। इस प्रक्रिया में कई स्तरों पर बिलों का फर्जीवाड़ा होता है, जिससे सरकार को मिलने वाला इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) प्रभावित होता है।
कंपनी की भूमिका पर भी सवाल
इस पूरे मामले में नुवोको विस्टास कॉर्पोरेशन लिमिटेड की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। बताया जा रहा है कि कंपनी को सीएनएफ के माध्यम से हो रही अनियमितताओं की जानकारी होने के बावजूद कंपनी ने कार्रवाई नहीं की, जिससे कर चोरी का यह नेटवर्क और मजबूत होता गया।

बालोद पुलिस की जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे
बालोद पुलिस की जांच में सामने आया है कि शशिभूषण शुक्ला द्वारा उपयोग किए गए कई दस्तावेज जाली पाए गए, जिन पर हस्ताक्षर मिलान नहीं हुआ। पुलिस ने यह भी पाया कि कई दस्तावेजों में एक ही व्यक्ति के अलग-अलग हस्ताक्षर हैं, जिससे स्पष्ट है कि दस्तावेजों की फर्जी तैयारियां सुनियोजित तरीके से की गईं।
विशेषज्ञों की राय
वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि जब किसी व्यक्ति पर पहले से धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा और जालसाजी के आरोप साबित हो चुके हों, तो ऐसे व्यक्ति का किसी बड़े कारोबारी समूह के साथ फिर से जुड़ना और जीएसटी चोरी में नाम आना सरकार की कर प्रणाली के लिए खतरे की घंटी है।

प्रशासनिक कार्रवाई की मांग तेज
अब इस पूरे मामले में वित्त विभाग, जीएसटी विभाग और खनिज विभाग से संयुक्त जांच की मांग उठाई जा रही है। सूत्र बताते हैं कि यदि इस नेटवर्क की पूरी तहकीकात की जाए, तो सीमेंट चोरी से लेकर जीएसटी चोरी तक का एक बड़ा रैकेट सामने आ सकता है।
Author: Deepak Mittal










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