“भगवान के बाप की भी औकात नहीं…” — पप्पू यादव के बयान से मचा बवाल

Picture of Deepak Mittal

Deepak Mittal

धार्मिक भावनाओं पर चोट का आरोप, सोशल मीडिया पर माफी की मांग तेज

पटना। बिहार की राजनीति में एक बार फिर सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव के विवादित बयान ने तूफान खड़ा कर दिया है। एक टीवी इंटरव्यू के दौरान दिए गए उनके उत्तेजक और आपत्तिजनक शब्दों ने न केवल राजनीतिक हलकों में बहस छेड़ दी है, बल्कि धार्मिक मान्यताओं पर भी बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है।

दरअसल, इंटरव्यू में पप्पू यादव ने कहा —

“निर्दलीय सांसद बनना भगवान के बाप की भी औकात नहीं।”

उनके इस कथन के बाद सोशल मीडिया पर जमकर प्रतिक्रियाएँ आने लगीं। विपक्षी दलों ने इसे “धार्मिक भावनाओं पर हमला” बताते हुए माफी की मांग की है, वहीं समर्थक इसे “रूपक में कही गई राजनीतिक बात” बता रहे हैं।

 धार्मिक टिप्पणी से भड़का विवाद

इंटरव्यू के दौरान पप्पू यादव ने भगवान कृष्ण और भगवान शिव के संदर्भ में भी कई विवादित बातें कहीं। उन्होंने कहा,

“आप शंकर जी को भगवान मानते हैं? मैं मानता हूँ कि शंकर ही सनातन धर्म की आत्मा हैं।”

जब एंकर ने इस पर आपत्ति जताई, तो यादव ने जवाब दिया,

“मैं किसी का अपमान नहीं कर रहा, लेकिन झूठे भगवान पैदा करने वाले कुकुरमुत्ते हो गए हैं।”

उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर #PappuYadavApologize ट्रेंड करने लगा। कई यूजर्स ने इसे “सनातन धर्म का अपमान” बताते हुए लोकसभा में उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

ईश्वर और आस्था पर पप्पू यादव की दार्शनिक बातें

यादव ने अपने इंटरव्यू में धर्म, ईश्वर और समाज के संबंध में कई दार्शनिक मगर विवादित बातें रखीं। उन्होंने कहा,

“ईश्वर की शक्ति प्रकृति से निर्देशित होती है। गॉड गाइड बाय नेचर एंड नेचर गाइड बाय गॉड।”

उनका कहना था कि यदि कोई व्यक्ति किसी पत्थर में देवत्व देखता है तो वह पत्थर देव बन जाता है — अन्यथा वह केवल पत्थर है। उन्होंने यह भी कहा कि झूठे देवताओं का निर्माण समाज में अंधविश्वास को बढ़ा रहा है।

 शिव और कृष्ण पर विचार

पप्पू यादव ने भगवान कृष्ण को दैवीय शक्ति नहीं बल्कि एक महान कर्मयोगी और ऐतिहासिक व्यक्तित्व बताया, जबकि भगवान शिव को “सनातन धर्म की आत्मा” कहा। उन्होंने कहा,

“शंकर ही सनातन धर्म का मूल तत्त्व हैं, वे ही सबसे बड़े आराध्य हैं।”

 आगे की प्रतिक्रिया

इंटरव्यू वायरल होने के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज है। कई संगठनों ने यादव से माफी की मांग की है, वहीं कुछ ने उनके बयान को व्यक्तिगत विचार बताया।
अभी तक पप्पू यादव की ओर से औपचारिक स्पष्टीकरण या माफी का बयान जारी नहीं किया गया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि धर्म से जुड़ी ऐसी टिप्पणी चुनावी मौसम में बूमरैंग साबित हो सकती है, क्योंकि इससे न केवल विरोधी दल बल्कि आम जनमानस भी नाराज़ हो सकता है।

Deepak Mittal
Author: Deepak Mittal

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

October 2026
S M T W T F S
 123
45678910
11121314151617
18192021222324
25262728293031

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *