दावोस: विश्व आर्थिक मंच (WEF) में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने भारत–यूरोपीय संघ (ईयू) संबंधों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि ईयू भारत के साथ एक ऐतिहासिक व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब पहुंच चुका है। अपने संबोधन में वॉन डेर लेयेन ने संकेत दिया कि यूरोप अब टैरिफ जैसे दबावों से बेपरवाह होकर नए वैश्विक साझेदारों के साथ मजबूत आर्थिक रिश्ते बनाने के लिए तैयार है।
ईयू अध्यक्ष ने कहा, “हमने कई देशों के साथ समझौते किए हैं और अभी भी काम बाकी है। भारत के साथ हम एक ऐसे ऐतिहासिक व्यापार समझौते के कगार पर हैं, जिसे कुछ लोग सभी समझौतों की जननी कहते हैं।” उन्होंने बताया कि यह समझौता करीब 2 अरब लोगों के लिए एक साझा बाजार तैयार करेगा, जो वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का लगभग एक चौथाई हिस्सा होगा।
वॉन डेर लेयेन के मुताबिक, यह संभावित मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) यूरोप को आर्थिक रूप से और मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि यूरोप अब लैटिन अमेरिका से लेकर एशिया-प्रशांत क्षेत्र तक के आर्थिक पावरहाउस के साथ साझेदारी बढ़ा रहा है और दुनिया भी यूरोप के साथ सहयोग के लिए आगे आ रही है।
ईयू अध्यक्ष अगले सप्ताह भारत दौरे पर रहेंगी और 26 जनवरी को 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि होंगी। उन्होंने कहा कि मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियां यूरोप के लिए एक अवसर हैं और अब ईयू को अपनी आर्थिक व रणनीतिक ताकत को और तेज़ी से मजबूत करने की जरूरत है। उन्होंने कहा, “जो बड़ा बदलाव हो रहा है, वह नई यूरोपीय आज़ादी की नींव रखता है—चाहे वह रक्षा हो, अर्थव्यवस्था हो या लोकतंत्र।”
सूत्रों के अनुसार, भारत और ईयू 27 जनवरी को एक ऐतिहासिक एफटीए को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं। इस दौरान दोनों पक्ष एक संयुक्त दस्तावेज अपनाएंगे, जिसके बाद समझौते को कानूनी प्रक्रिया और यूरोपीय संसद व परिषद की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। इसके अलावा, सुरक्षा और रक्षा साझेदारी तथा ईयू में भारतीयों की रोजगार से जुड़ी मोबिलिटी बढ़ाने को लेकर भी समझौतों पर हस्ताक्षर हो सकते हैं।
गौरतलब है कि यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष वॉन डेर लेयेन संयुक्त रूप से गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि होंगे और इसके बाद भारत–ईयू शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता करेंगे। पहली बार ईयू की एक सैन्य टुकड़ी भी गणतंत्र दिवस परेड में हिस्सा लेगी, जो दोनों पक्षों के बढ़ते रणनीतिक संबंधों का संकेत है। यह प्रस्तावित व्यापार समझौता भारत का अब तक का सबसे बड़ा व्यापारिक करार माना जा रहा है, जिसमें 27 देशों वाले यूरोपीय संघ के साथ वस्तुओं और सेवाओं का व्यापक दायरा शामिल होगा।
Author: Deepak Mittal










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