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रिश्वतखोर आरक्षक का अंत! ओवरलोड वाहनों से अवैध वसूली करने वाले अर्जुन दुबे को बर्खास्त, दो पुलिसकर्मी भी लाइन अटैच

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Deepak Mittal

रिश्वतखोर आरक्षक का अंत! ओवरलोड वाहनों से अवैध वसूली करने वाले अर्जुन दुबे को बर्खास्त, दो पुलिसकर्मी भी लाइन अटैच

भ्रष्टाचार के खिलाफ दुर्ग पुलिस की सख्त कार्रवाई, एसएसपी विजय अग्रवाल बोले — “वसूली करने वालों की जगह सेवा में नहीं, सस्पेंशन में है।”

दुर्ग। पुलिस विभाग में अनुशासन और ईमानदारी का संदेश देते हुए दुर्ग पुलिस ने भ्रष्टाचार के मामले में बड़ा कदम उठाया है। ओवरलोड वाहनों से अवैध वसूली करने के आरोप में रक्षित केंद्र में पदस्थ आरक्षक क्रमांक 597 अर्जुन दुबे को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। विभागीय जांच में आरोप प्रमाणित पाए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई।

जानकारी के अनुसार, अर्जुन दुबे की भर्ती वर्ष 2011 में हुई थी और वह लंबे समय से यातायात विभाग में पदस्थ था। इसी दौरान उस पर आरोप लगा कि वह ओवरलोड मालवाहक वाहनों से नियमित रूप से वसूली करता था। सूत्रों के अनुसार, दुबे ने कई बार वाहन चालकों से ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के जरिए भी पैसे वसूले थे।

शिकायतों की पुष्टि होने पर विभागीय जांच शुरू की गई। जांच में दुबे के खिलाफ पेश किए गए वित्तीय रिकॉर्ड और ट्रांजैक्शन साक्ष्य को ठोस पाया गया। जांच अधिकारी ने रिपोर्ट में उल्लेख किया कि उसने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अवैध कमाई की है।

रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद 8 अक्टूबर 2025 को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) विजय अग्रवाल ने आरक्षक अर्जुन दुबे को सेवा से पृथक कर बर्खास्त करने का आदेश जारी किया।

एसएसपी अग्रवाल ने सख्त शब्दों में कहा —

“पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार, वसूली या किसी भी अनैतिक गतिविधि के लिए कोई स्थान नहीं है। जो भी कर्मचारी अपने कर्तव्य से भटकेगा, उसके खिलाफ तत्काल कठोर कार्रवाई की जाएगी।”

इसी कार्रवाई के तहत सुपेला थाना क्षेत्र की स्मृति नगर चौकी में पदस्थ एएसआई प्रमोद सिंह और सिपाही रवि ठाकुर को भी लाइन अटैच किया गया है। दोनों पर ड्यूटी के दौरान लापरवाही और संदिग्ध गतिविधियों के आरोप लगे थे।

स्थानीय नागरिकों ने एसएसपी की इस सख्त कार्रवाई का स्वागत करते हुए कहा कि इससे विभाग की साख में सुधार होगा और जनता का विश्वास बढ़ेगा। पुलिस विभाग का यह कदम न केवल भ्रष्टाचार के खिलाफ चेतावनी है, बल्कि यह भी संदेश देता है कि “वर्दी के पीछे छिपी गलत नीयत” अब नहीं बचेगी।

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