नई दिल्ली: गोवा के चर्चित नाइटक्लब अग्निकांड मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए दिल्ली, गोवा और हरियाणा में कुल 9 परिसरों पर एक साथ छापेमारी की। यह तलाशी अभियान नाइटक्लब के अवैध संचालन और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की जांच के तहत चलाया जा रहा है।
अधिकारियों के अनुसार, ईडी की यह कार्रवाई सौरभ और गौरव लूथरा से जुड़े ठिकानों पर की जा रही है। दिल्ली में 5, गोवा में 3 और हरियाणा के गुरुग्राम में 1 स्थान पर तलाशी ली जा रही है, जिसमें उनके आवासीय और कार्यालय परिसर शामिल हैं। ईडी ने शुक्रवार तड़के से ही लूथरा बंधुओं और अजय गुप्ता के ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया।
लूथरा बंधु और अजय गुप्ता गोवा के अरपोरा इलाके में स्थित ‘बर्च बाय रोमियो लेन’ नाइटक्लब के मालिक बताए जा रहे हैं। इसी क्लब में 6 दिसंबर 2025 को भीषण आग लगने की घटना हुई थी, जिसमें 25 लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए थे। घटना के बाद नाइटक्लब के प्रमोटर कथित तौर पर थाईलैंड भाग गए थे, हालांकि 17 दिसंबर को उन्हें भारत प्रत्यर्पित कर दिया गया था। फिलहाल वे गोवा पुलिस की हिरासत में हैं।
ईडी की गोवा इकाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत इस मामले में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच कर रही है। तलाशी अभियान के दायरे में दिल्ली और गोवा के 8-9 स्थान शामिल हैं, जिनमें गुरुग्राम के आउट्राम लेन्स (किंग्सवे कैंप) और तत्वम विलास स्थित परिसर भी शामिल हैं। इसके अलावा गोवा में तत्कालीन सरपंच रोशन रेडकर और पंचायत सचिव रघुवीर बागकर के परिसरों पर भी छापेमारी की जा रही है, जिन पर अवैध व्यापार लाइसेंस और एनओसी जारी करने का आरोप है।
ईडी की टीमें सुरिंदर कुमार खोसला के परिसर में भी तलाशी ले रही हैं। जांच का यह पहलू उस खाजान भूमि (नमक के खेत) के कथित अवैध रूपांतरण से जुड़ा है, जिस पर ‘बर्च बाय रोमियो लेन’ नाइटक्लब का निर्माण किया गया था।
अधिकारियों ने बताया कि तलाशी का उद्देश्य संबंधित संस्थाओं के स्वामित्व, संचालन और वित्तीय लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों की जांच करना है। यह पूरा मामला गोवा में हुई भीषण आग की घटना से जुड़ा है, जिसने सुरक्षा मानकों के उल्लंघन और नियामक नियमों की अनदेखी को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे।
सूत्रों के मुताबिक, ईडी की यह जांच स्थानीय एजेंसियों द्वारा दर्ज किए गए मूल अपराध के आधार पर शुरू की गई है, जिसके बाद केंद्रीय एजेंसी ने मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े लेन-देन की जांच का दायरा बढ़ाया है।
Author: Deepak Mittal










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