ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अल-फलाह समूह के चेयरमैन के खिलाफ दायर की चार्जशीट

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दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक बड़े मामले में विवादित अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट/अल-फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी और अन्य के खिलाफ विशेष पीएमएलए अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया है। ईडी ने इस मामले में करीब 139.97 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति भी कुर्क की है, जिसमें लगभग 54 एकड़ जमीन और उस पर बने निर्माण शामिल हैं।

ईडी की ओर से जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, अब तक इस मामले में अपराध से अर्जित कुल राशि करीब 493.24 करोड़ रुपये आंकी गई है। जांच एजेंसी ने बताया कि अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट, अल-फलाह यूनिवर्सिटी और इससे जुड़ी संस्थाएं लंबे समय से एजेंसियों के रडार पर थीं। खासतौर पर उस समय विवाद गहराया, जब आतंकवाद विरोधी एजेंसियों ने यूनिवर्सिटी में कार्यरत डॉक्टरों से जुड़े एक मॉड्यूल का खुलासा किया। बताया गया है कि यूनिवर्सिटी से जुड़े एक डॉक्टर का कथित तौर पर 10 नवंबर को लाल किले के पास हुए कार विस्फोट से संबंध सामने आया था।

ईडी मुख्यालय ने बताया कि मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम, 2002 के तहत सक्षम पीएमएलए कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई है। जवाद अहमद सिद्दीकी को पीएमएलए की धारा 19 के तहत 18 नवंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था और वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। यह जांच दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर संख्या 337 और 338 (दिनांक 13 नवंबर 2025) तथा एफआईआर संख्या 0021 (दिनांक 10 जनवरी 2026) के आधार पर की जा रही है।

ईडी के अनुसार, जवाद अहमद सिद्दीकी का अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट, अल-फलाह यूनिवर्सिटी (जिसमें अल-फलाह स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च सेंटर भी शामिल है) और उससे जुड़ी संस्थाओं पर पूर्ण नियंत्रण था। वह गैरकानूनी कमाई का मुख्य लाभार्थी था। मैनेजिंग ट्रस्टी और चांसलर के रूप में उसने प्रशासनिक, वित्तीय और परिचालन नियंत्रण अपने हाथ में रखा और अन्य पदाधिकारियों को नाममात्र के रूप में इस्तेमाल किया।

जांच में यह भी सामने आया है कि मेडिकल कॉलेज के संचालन में एनएमसीई के नियमों का उल्लंघन किया गया और जरूरी तथ्यों को छिपाकर व गलत जानकारी देकर मंजूरी व सर्टिफिकेशन हासिल किया गया। ईडी ने दावा किया कि सिद्दीकी ने परिवार द्वारा नियंत्रित संस्थाओं के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग की। संस्थागत फंड आमला एंटरप्राइजेज एलएलपी, करकुन कंस्ट्रक्शन एंड डेवलपर्स और दियाला कंस्ट्रक्शन एंड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड जैसी परिवार नियंत्रित कंपनियों के माध्यम से ट्रांसफर किए गए।

जांच एजेंसी को विदेशी लेनदेन और विदेश में फंड की हेराफेरी के भी साक्ष्य मिले हैं। ईडी के मुताबिक, सिद्दीकी की पत्नी के नाम पर 3 करोड़ रुपये से अधिक और बेटे के नाम पर करीब 1 करोड़ रुपये के विदेशी लेनदेन पाए गए हैं। जांच में यह भी निष्कर्ष निकला है कि चैरिटेबल और शैक्षणिक संस्थानों का इस्तेमाल निजी, पारिवारिक और व्यावसायिक लाभ के लिए किया गया।

ईडी ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच जारी है और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े सभी पहलुओं की गहनता से पड़ताल की जा रही है।

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Author: Deepak Mittal

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