₹7.60 लाख में प्रत्येक ग्राम पंचायत को एक ईवी गार्बेज रिक्शा एवं एक ईवी लोडर वाहन,कुल दो वाहन GeM पोर्टल पर L-1 प्रक्रिया के बाद हुई खरीदी, भुगतान अब तक नहीं
डौंडीलोहारा। कुछ समाचार पत्रों में जनपद पंचायत डौंडीलोहारा द्वारा 19 ग्राम पंचायतों के लिए ई-रिक्शा एवं ईवी लोडर वाहन खरीदी में अनियमितता संबंधी समाचार प्रकाशित किया गया है। इस संबंध में जनपद पंचायत प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि संपूर्ण खरीदी प्रक्रिया शासन के निर्धारित वित्तीय नियमों एवं GeM (गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस) पोर्टल के माध्यम से पूर्ण पारदर्शिता के साथ संपन्न की गई है। प्रकाशित समाचार में लगाए गए आरोप तथ्यहीन, भ्रामक एवं वास्तविक तथ्यों से परे हैं।
प्रशासन ने बताया कि शासन द्वारा संचालित सभी खरीदी प्रक्रियाएं निर्धारित वित्तीय नियमों एवं GeM पोर्टल के माध्यम से पारदर्शी व्यवस्था के अंतर्गत संपन्न की जाती हैं। GeM पोर्टल पर प्रतिस्पर्धात्मक ऑनलाइन निविदा प्रक्रिया अपनाई गई, जिसमें विभिन्न राज्यों के अधिकृत विक्रेताओं ने भाग लिया। तकनीकी एवं वित्तीय मूल्यांकन के बाद L-1 (सबसे कम दर) प्राप्त होने पर शासन के नियमानुसार खरीदी की प्रक्रिया पूरी की गई।

जनपद पंचायत प्रशासन के अनुसार प्रत्येक ग्राम पंचायत के लिए ₹7,60,000 की लागत से एक ईवी गार्बेज रिक्शा एवं एक ईवी लोडर वाहन उपलब्ध कराया गया है। यह पूरी खरीदी प्रतिस्पर्धात्मक ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से न्यूनतम दर एवं सर्वोत्तम गुणवत्ता सुनिश्चित करते हुए की गई है। वर्तमान बाजार मूल्य की तुलना में भी शासन को लाभकारी एवं किफायती दरों पर सामग्री उपलब्ध कराई गई है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि ई-रिक्शा एवं ईवी लोडर वाहनों का भुगतान अभी तक किसी भी एजेंसी अथवा आपूर्तिकर्ता को नहीं किया गया है। सामग्री प्राप्त होने के बाद शासन की निर्धारित जांच, सत्यापन एवं अन्य औपचारिकताओं की प्रक्रिया जारी है। सभी आवश्यक परीक्षण एवं दस्तावेजी सत्यापन पूर्ण होने के पश्चात ही भुगतान किया जाएगा। इसलिए वित्तीय अनियमितता का प्रश्न ही नहीं उठता।

प्रत्येक ग्राम पंचायत को प्राप्त एक ईवी गार्बेज रिक्शा एवं एक ईवी लोडर वाहन का उपयोग स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत घर-घर से गीला एवं सूखा कचरा पृथक-पृथक संग्रहित करने के साथ-साथ ग्राम पंचायतों की अन्य आवश्यक सेवाओं में भी किया जा रहा है। इन वाहनों के संचालन एवं रखरखाव के संबंध में जनपद पंचायत द्वारा संबंधित महिला स्व-सहायता समूहों एवं ग्राम पंचायतों को आवश्यक प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया है।
जनपद पंचायत डौंडीलोहारा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी पंकज देव ने कहा,
“यह योजना केवल वाहन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और स्वच्छ भारत मिशन को मजबूत करने की एक महत्वपूर्ण पहल है। प्रत्येक ग्राम पंचायत में दो-दो ईवी गार्बेज रिक्शा उपलब्ध होने से स्व-सहायता समूह की महिलाएं नियमित रूप से घर-घर जाकर गीला एवं सूखा कचरा अलग-अलग एकत्रित कर रही हैं। इससे गांवों में स्वच्छता व्यवस्था मजबूत हुई है तथा महिलाओं को रोजगार एवं आय का स्थायी माध्यम मिला है।”
उन्होंने कहा,प्रत्येक ग्राम पंचायत को ₹7.60 लाख की लागत से एक ईवी गार्बेज रिक्शा एवं एक ईवी लोडर वाहन उपलब्ध कराया गया है। पूरी खरीदी GeM पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन, पारदर्शी एवं प्रतिस्पर्धात्मक प्रक्रिया अपनाते हुए L-1 दर पर की गई है। सभी नियमों एवं वित्तीय प्रावधानों का अक्षरशः पालन किया गया है।”
उन्होंने आगे कहा,”ईवी लोडर वाहन ग्राम पंचायतों के लिए बहुउपयोगी सिद्ध हो रहे हैं। भवन निर्माण सामग्री, कृषि उत्पाद, घरेलू सामान, किराना सामग्री तथा अन्य आवश्यक वस्तुओं के परिवहन में इनका उपयोग किया जा रहा है। कई महिला समूह इन वाहनों के माध्यम से अतिरिक्त आजीविका के अवसर भी प्राप्त कर रहे हैं।””ईवी वाहनों के संचालन में पेट्रोल एवं डीजल की आवश्यकता नहीं होती। केवल चार्जिंग से इनका संचालन संभव है, जिससे ईंधन व्यय में भारी बचत हो रही है। साथ ही प्रदूषण में कमी आ रही है और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है। इसलिए इस योजना का लाभ ग्रामीणों, महिला समूहों और पर्यावरण—तीनों को मिल रहा है।”
महिलाओं ने बताया योजना का लाभ
खडबततर की सरपंच बिरन बाई नेताम और सुनीता यादव (स्व-सहायता समूह सदस्य) ने कहा, “पहले कचरा संग्रहण के लिए पर्याप्त साधन नहीं थे। अब ई-रिक्शा मिलने से घर-घर जाकर गीला एवं सूखा कचरा अलग-अलग एकत्रित कर रहे हैं। इससे हमारी आय भी बढ़ी है और गांव भी साफ-सुथरा हो रहा है।”
किल्लेकोड़ा की सरपंच हेमलता विश्वकर्मा ने कहा कि, “ईवी रिक्शा चलाने में पेट्रोल-डीजल का कोई खर्च नहीं होता। केवल चार्जिंग करनी पड़ती है, जिससे काफी बचत होती है और काम भी आसान हो गया है।”
झरनटोला सरपंच दिनेश कुमार ध्रुव, “लोडर वाहन मिलने से भवन निर्माण सामग्री, खाद, सीमेंट, घरेलू सामान एवं अन्य सामग्री आसानी से पहुंचाई जा रही है। इससे गांव के लोगों को भी सुविधा मिल रही है।”
कविता मरकाम ने कहा, “महिला समूह अब पहले से अधिक आत्मनिर्भर हुआ है। स्वच्छता कार्य के साथ-साथ अन्य छोटे व्यवसायों में भी इन वाहनों का उपयोग कर अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं।”
गीता निषाद ने कहा, “ईवी वाहन पर्यावरण के लिए बेहतर हैं। धुआं नहीं निकलता और संचालन खर्च भी बहुत कम है। इससे महिलाओं की आय बढ़ रही है और गांव की स्वच्छता व्यवस्था भी मजबूत हुई है।”
पारदर्शिता और जनहित सर्वोपरि
जनपद पंचायत प्रशासन ने पुनः स्पष्ट किया है कि पूरी खरीदी प्रक्रिया GeM पोर्टल पर ऑनलाइन एवं सार्वजनिक प्रतिस्पर्धात्मक निविदा के माध्यम से, शासन के सभी वित्तीय नियमों और दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए संपन्न की गई है। खरीदी से संबंधित प्रत्येक दस्तावेज एवं अभिलेख उपलब्ध हैं तथा आवश्यकता पड़ने पर सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किए जा सकते हैं। प्रशासन ने अपील की है कि जनहित की योजनाओं के संबंध में अपुष्ट एवं भ्रामक जानकारी के बजाय तथ्यात्मक एवं प्रमाणिक जानकारी ही प्रकाशित की जाए, ताकि ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं के प्रति अनावश्यक भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो।
Author: Deepak Mittal









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