रायपुर। आगामी 28 मई 2026, गुरुवार को देशभर में ईद-उल-अजहा (बकरीद) का पर्व मनाया जाएगा। छत्तीसगढ़ में ईद की नमाज सुबह 6 बजे से 11 बजे के बीच विभिन्न मस्जिदों और ईदगाहों में निर्धारित समयानुसार अदा की जाएगी। इसके बाद लोग एक-दूसरे को ईद की मुबारकबाद देंगे।
इस अवसर पर समाजसेवी डॉ. सलीम राज ने मुस्लिम समाज से अपील करते हुए कहा कि ईद-उल-अजहा का त्योहार हजरत इब्राहीम अलैहिस्सलाम और हजरत इस्माईल अलैहिस्सलाम की कुर्बानी और त्याग की याद में मनाया जाता है। इस दौरान 28 मई के सूर्योदय से 30 मई के सूर्यास्त तक साहिब-ए-निसाब मुस्लिमों द्वारा कुर्बानी दी जाती है।
उन्होंने कहा कि इस्लाम धर्म, कुरआन और हदीस सभी धर्मों के प्रति सम्मान, आपसी भाईचारे और साम्प्रदायिक सौहार्द का संदेश देते हैं। पैगम्बर साहब ने भी हमें जिस देश में रहें, वहां के संविधान और समाज की भावनाओं का सम्मान करने की सीख दी है।
डॉ. सलीम राज ने कहा कि कई बार कुछ लोग खुले स्थानों पर कुर्बानी करते हैं या उसकी फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर देते हैं, जिससे अन्य समुदायों की भावनाएं आहत होती हैं और सामाजिक वातावरण प्रभावित होता है।
उन्होंने मुस्लिम समाज से अपील की कि ईद-उल-अजहा के अवसर पर सार्वजनिक स्थलों या खुले क्षेत्रों में कुर्बानी न करें, प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी से बचें तथा कुर्बानी से जुड़े फोटो-वीडियो सोशल मीडिया पर साझा न करें। साथ ही कुर्बानी के बाद साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें, खून को नालियों में न बहाएं तथा अपशिष्ट पदार्थों को गड्ढा खोदकर उचित तरीके से दफनाएं।
उन्होंने यह भी कहा कि सड़क पर नमाज अदा करने से बचें। यदि नमाजियों की संख्या अधिक हो तो पूर्व वर्षों की तरह अलग-अलग पालियों में नमाज की व्यवस्था की जाए। सभी समाजों की आस्था का सम्मान करते हुए आपसी भाईचारे और सौहार्द के साथ ईद-उल-अजहा का पर्व मनाने की अपील की गई।
Author: Deepak Mittal









