जे के मिश्र
जिला ब्यूरो चीफ
नवभारत टाइम्स 24*7in बिलासपुर
बिलासपुर 22 जुलाई। छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा हाल ही में जारी अधिसूचना ने प्रदेशभर के हजारों चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को गहरा झटका दिया है। बीते 25 वर्षों से चतुर्थ वर्ग के कर्मचारियों को तीसरी श्रेणी (लिपिकीय पदों) पर पदोन्नति का अवसर मिलता रहा है, जिसे अब एक नए आदेश के जरिए जटिल शर्तों में उलझा दिया गया है। कर्मचारी संगठनों में इस निर्णय को लेकर भारी नाराजगी है।
चतुर्थ श्रेणी से तृतीय श्रेणी में पदोन्नति की प्रक्रिया को लेकर पहले यह व्यवस्था थी कि हाई स्कूल पास और पांच साल सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों को विभागीय समिति की अनुशंसा से पदोन्नति दी जाती थी। लंबे संघर्ष के बाद यह कोटा 10% से बढ़ाकर 25% कर दिया गया था। लेकिन अब शासन ने नए निर्देश जारी कर कहा है कि तृतीय श्रेणी में पदोन्नति केवल उन्हीं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को दी जाएगी, जिन्होंने मान्यता प्राप्त संस्थान से कंप्यूटर डिग्री प्राप्त की हो।
चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी संघ के नेता विजय कुमार झा ने बताया कि यह नई शर्त हजारों कर्मचारियों के लिए अव्यवहारिक और अन्यायपूर्ण है। अब तक विभाग केवल गोपनीय आचरण रिपोर्ट के आधार पर पदोन्नति करता था, और किसी भी तरह की कंप्यूटर या टाइपिंग परीक्षा की अनिवार्यता नहीं थी। नई व्यवस्था में नियुक्ति से वर्षों से सेवा दे रहे कर्मचारियों को बाहर कर दिया गया है, जिससे उनमें रोष है।
श्री झा ने यह भी बताया कि शासन द्वारा अन्य उच्च पदों के लिए भी योग्यता की शर्तें बदलकर डिप्लोमा और ग्रेजुएट डिग्रियों की अनिवार्यता लागू की जा रही है, जिससे पढ़े-लिखे बेरोजगारों को नौकरी मिलने की संभावना कम हो रही है और मौजूदा कर्मचारियों के लिए भी पदोन्नति के रास्ते बंद हो रहे हैं।
उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की है कि इस अधिसूचना को तत्काल प्रभाव से रद्द कर पूर्व की व्यवस्था बहाल की जाए, जिससे पात्र कर्मचारियों को उनके अनुभव और सेवा के आधार पर तृतीय श्रेणी में पदोन्नति मिल सके। अन्यथा कर्मचारी संघ को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा।
चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष बिन्देसरी राम सैंथिया ने भी स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि सरकार ने फैसला नहीं बदला, तो प्रदेशव्यापी विरोध की तैयारी की जाएगी।

Author: Deepak Mittal
