मोदीपुरम : मंगलवार दोपहर दिल्ली-देहरादून हाईवे पर उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब हरिद्वार से मध्य प्रदेश जा रही 324 टायरों वाली विशालकाय गाड़ी हाईवे पर पहुंची। इस ट्रक पर रखी थी करीब 70 मीटर लंबी और 40 मीटर चौड़ी टर्बाइन मशीन, जिसे देखने के लिए रास्ते भर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। नतीजा—कंकरखेड़ा से मुजफ्फरनगर के खतौली तक लंबा जाम।
मशीन देखते ही थमी सड़क, रेंगते रहे वाहन
दोपहर में जैसे-जैसे यह भारी-भरकम मशीन दौराला से कंकरखेड़ा की ओर बढ़ी, वैसे-वैसे हाईवे की रफ्तार थमती चली गई। वाहन कछुआ चाल में रेंगते नजर आए।
दौराला, पल्लवपुरम और कंकरखेड़ा पुलिस को मशीन को सुरक्षित निकालने और जाम खुलवाने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
तीन दिन कोहरे में फंसी रही ‘महामशीन’
जानकारी के मुताबिक, इस टर्बाइन मशीन को ले जा रही करीब 100 कर्मचारियों की टीम बीते तीन दिनों से कोहरे के कारण दौराला क्षेत्र में हाईवे की सर्विस लेन पर रुकी हुई थी।
मंगलवार को जैसे ही धूप निकली, टीम ने आगे बढ़ने का फैसला किया—और यहीं से जाम की कहानी शुरू हो गई।
आगे खींचा, पीछे धकेला… तब बढ़ी गाड़ी
इस 324 टायरों वाले ट्रक के साथ
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दो और बड़े ट्रक (छोटी मशीनों के साथ)
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तीन बोलेरो गाड़ियां (कर्मचारियों के साथ)
चल रही थीं। सभी कर्मचारी वॉकी-टॉकी से लगातार संपर्क में थे।
मशीन को आगे बढ़ाने के लिए एक ट्रक आगे से खींच रहा था, जबकि दूसरा पीछे से धक्का दे रहा था। तीसरा ट्रक साथ-साथ चल रहा था।
टोल प्लाजा पर भी बदली ट्रैफिक व्यवस्था
सिवाया टोल प्लाजा पर स्थिति और गंभीर हो गई। मशीन निकालने के लिए आखिरी दो लेन को एक करना पड़ा। पुलिस ने मशीन वाली गाड़ियों को कहीं रुकने नहीं दिया, ताकि जाम और न बढ़े—लेकिन फिर भी ट्रैफिक सामान्य करने में समय लगा।
पुलिस बोली – मौसम खुलते ही बढ़ी, इसलिए लगा जाम
दौराला इंस्पेक्टर सुमन कुमार सिंह ने बताया कि
“तीन दिन से मशीन मटौर के पास खड़ी थी। मौसम साफ होते ही कर्मचारी चल दिए, जिससे जाम की स्थिति बनी। बाद में पुलिस ने स्थिति संभाली।”
वहीं, कंकरखेड़ा इंस्पेक्टर विनय कुमार के मुताबिक,
“जिटौली पुल से ही पुलिस की गाड़ी मशीन के साथ चल रही थी। मशीन को रुकने नहीं दिया गया और वाहनों को सुरक्षित निकलवाया गया।”
एक सवाल अब भी बाकी है—
अगर एक मशीन से पूरा हाईवे जाम हो सकता है, तो भविष्य में ऐसी भारी परियोजनाओं के लिए ट्रैफिक प्लान कितना तैयार है?
हाईवे पर मची इस ‘दानव मशीन’ की दहशत को लोग अभी लंबे समय तक याद रखेंगे।
Author: Deepak Mittal










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