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2015 की तुलना में बस्तर संभाग में मलेरिया के मामलों में ऐतिहासिक गिरावट, API 27.4 से घटकर 7.11; सरकार की ‘मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़’ मुहिम को बड़ी सफलता
रायपुर।
छत्तीसगढ़ सरकार की ‘मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़’ योजना ने बस्तर जैसे दुर्गम और आदिवासी बहुल इलाके में बड़ी सफलता दर्ज की है। राज्य शासन द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार 2015 की तुलना में वर्ष 2024 में मलेरिया मामलों में 72% की गिरावट आई है। मलेरिया धनात्मक दर भी 4.60% से घटकर अब मात्र 0.46% रह गई है।
बस्तर में हुआ मलेरिया पर निर्णायक वार
बस्तर संभाग में राज्य का वार्षिक परजीवी सूचकांक (API) वर्ष 2015 में 27.4 था, जो अब घटकर 7.11 पर आ गया है। राज्य स्तर पर भी API 5.21 से घटकर 0.98 तक आ गया है। 2023 की तुलना में भी 2024 में मलेरिया मामलों में 8.52% की कमी दर्ज की गई है।
जन-संवेदनशील प्रयासों का असर: सीएम विष्णु देव साय
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर करते हुए इसे “जन-केंद्रित सोच और समर्पित स्वास्थ्य प्रयासों का परिणाम” बताया। उन्होंने कहा,
“बस्तर जैसे जटिल इलाके में मलेरिया नियंत्रण में मिली यह सफलता मितानिनों, स्वास्थ्यकर्मियों और जनभागीदारी की जीत है। ये आंकड़े सिर्फ संख्याएं नहीं, ये एक स्वस्थ छत्तीसगढ़ के भविष्य की गवाही हैं।”
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया मलेरिया मुक्त राज्य का लक्ष्य
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल बस्तर ही नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ को मलेरिया मुक्त बनाना है।
उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा
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मच्छरदानियों का वितरण,
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घर-घर जाकर स्क्रीनिंग,
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त्वरित उपचार
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और जागरूकता अभियान
जैसी योजनाएं चलाकर मलेरिया के प्रसार को प्रभावी ढंग से रोका गया है।
WHO और NVBDCP के दिशा-निर्देशों पर हो रहा काम
छत्तीसगढ़ सरकार का यह अभियान राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम (NVBDCP) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानकों पर आधारित है। वर्ष 2024 में अभियान के 10वें और 11वें चरण के दौरान बस्तर में विशेष निगरानी, ट्रीटमेंट और आउटरीच गतिविधियों को बढ़ावा दिया गया।
सीएम ने जताया सभी को धन्यवाद
मुख्यमंत्री ने इस अभियान में योगदान देने वाले **मितानिन
Author: Deepak Mittal










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