रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र जारी है। शुक्रवार को सदन में तीन महत्वपूर्ण रिपोर्टें पेश की जाएंगी। इनमें छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) और छत्तीसगढ़ गौसेवा आयोग की रिपोर्ट शामिल है।
सदन की कार्यवाही के दौरान दो अलग-अलग विषयों पर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव भी लाए जाएंगे। इसके साथ ही वित्तीय वर्ष 2026-27 के आय-व्यय पर सदस्यों के बीच सामान्य चर्चा होगी। सत्र में दो अशासकीय संकल्प प्रस्तुत किए जाने की भी संभावना है।
धान खरीदी पर सरकार को घेर रही कांग्रेस
इस बीच राज्य के प्रमुख विपक्षी दल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने धान खरीदी में कथित कुप्रबंधन को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस का आरोप है कि दो लाख से अधिक किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर अपनी उपज नहीं बेच पा रहे हैं।
इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस सदस्यों ने सदन में चर्चा की मांग की और आसन के समीप पहुंचकर विरोध जताया। विधानसभा के नियमानुसार वे कुछ समय के लिए स्वतः निलंबित हो गए।
नेता प्रतिपक्ष ने उठाए गंभीर सवाल
शून्यकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने स्थगन प्रस्ताव पेश करते हुए मामले पर विस्तृत चर्चा की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार धान खरीदी योजना के तहत पर्याप्त व्यवस्था करने में विफल रही है, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
महंत के अनुसार खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में सरकार ने 25,24,339 किसानों से 141.04 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा, जो वर्तमान सरकार के कार्यकाल में सबसे कम है। उन्होंने दावा किया कि 27,36,171 पंजीकृत किसानों में से 2,11,832 किसान अपनी उपज नहीं बेच पाए।
महंत ने इसे जानबूझकर जटिल बनाई गई खरीद प्रक्रिया बताया। उनका कहना है कि प्रभावित किसानों में 1,30,369 किसान अनुसूचित क्षेत्रों से हैं, जिनमें बड़ी संख्या आदिवासी किसानों की है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के गृह जिले जशपुर में 50,050 किसानों ने पंजीकरण कराया था, लेकिन केवल 41,092 किसान ही अपना धान बेच पाए।
धान खरीदी के मुद्दे पर सत्र के दौरान तीखी बहस होने के आसार हैं।
Author: Deepak Mittal










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