जयपुर के नीरजा मोदी स्कूल में मासूम की मौत के बाद CBSE का बड़ा एक्शन, मान्यता तत्काल रद्द

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Deepak Mittal

जयपुर: 1 नवंबर का वो दिन… जब जयपुर के नामी नीरजा मोदी स्कूल की चौथी मंजिल से कूदकर चौथी कक्षा की एक मासूम बच्ची ने अपनी जिंदगी खत्म कर ली। यह सिर्फ एक आत्महत्या नहीं थी, बल्कि सिस्टम की बेरुखी, स्कूल की लापरवाही और संवेदनहीनता का नतीजा थी।
अब इस मामले में CBSE ने ऐसा फैसला सुनाया है, जिसने पूरे शिक्षा तंत्र को झकझोर दिया है। बोर्ड ने नीरजा मोदी स्कूल की मान्यता तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी है।

CBSE की जांच रिपोर्ट में जो खुलासे हुए हैं, वे दिल दहला देने वाले हैं और यह सवाल खड़ा करते हैं—
क्या आज के स्कूल बच्चों के लिए सच में सुरक्षित हैं?

 मौत से पहले के वो 45 मिनट, जब बच्ची चीख-चीखकर मदद मांगती रही

CBSE की रिपोर्ट के मुताबिक, आत्महत्या से ठीक पहले करीब 45 मिनट तक बच्ची मानसिक तनाव में तड़पती रही

वो 5 बार अपनी क्लास टीचर के पास गई,
लेकिन हैरानी की बात यह रही कि
किसी ने उसकी एक भी बात नहीं सुनी।

टीचर ने न तो उसकी परेशानी को गंभीरता से लिया और न ही किसी तरह की काउंसलिंग या मदद की कोशिश की।

 बुलिंग का घिनौना सच, CCTV में कैद दर्द

जांच में सामने आया कि बच्ची को क्लास के कुछ लड़के लंबे समय से बुली कर रहे थे
एक डिजिटल स्लेट पर आपत्तिजनक बातें लिख दी गईं, जिससे वह बेहद शर्मिंदा और टूट चुकी थी।

CCTV फुटेज में साफ देखा गया कि

बच्ची उन लड़कों से गिड़गिड़ाकर लिखी बात मिटाने की मिन्नत कर रही थी,
लेकिन कोई उसे बचाने नहीं आया।

 माता-पिता ने पहले ही दी थी चेतावनी, फिर भी आंखें मूंदे रहा स्कूल

यह मामला और भी गंभीर तब हो जाता है, जब पता चलता है कि

  • जुलाई 2024 में ही बच्ची के माता-पिता ने स्कूल से बुलिंग की शिकायत की थी।

  • सितंबर 2025 की पेरेंट्स-टीचर मीटिंग में पिता ने खुद एक छात्र को अपनी बेटी को परेशान करते हुए देखा।

लेकिन एक्शन लेने की बजाय टीचर ने जो कहा, वो रोंगटे खड़े कर देता है—

बच्ची को एडजस्ट करना सीखना चाहिए।

 CBSE ने क्यों रद्द की मान्यता?

CBSE ने अपनी रिपोर्ट में साफ लिखा—

“नीरजा मोदी स्कूल बच्चों को सुरक्षित माहौल देने में पूरी तरह विफल रहा।”

बोर्ड ने पाया कि:

  • स्कूल में शिकायत सुनने का कोई प्रभावी सिस्टम नहीं था

  • मेंटल हेल्थ काउंसलिंग की कोई व्यवस्था नहीं

  • बच्चों की सुरक्षा से जुड़े नियमों का घोर उल्लंघन

CBSE ने कहा—

“स्कूल बच्चों के लिए सुरक्षित पनाहगाह होना चाहिए, लेकिन यहां लापरवाही ने एक मासूम की जान ले ली।”

 अब स्कूल में पढ़ रहे बच्चों का क्या होगा?

CBSE ने सख्त फैसला लेते हुए बच्चों के भविष्य का भी ध्यान रखा है—

 10वीं–12वीं के छात्र

  • शैक्षणिक सत्र 2025-26 में

  • इसी स्कूल से बोर्ड परीक्षा दे सकेंगे

 9वीं–11वीं के छात्र

  • अगले सत्र से

  • आसपास के दूसरे CBSE स्कूलों में शिफ्ट किए जाएंगे

 नया एडमिशन बंद

  • अब स्कूल किसी भी क्लास में नया एडमिशन नहीं ले सकेगा

 यह सिर्फ एक स्कूल नहीं, पूरे सिस्टम के लिए चेतावनी

यह फैसला सिर्फ नीरजा मोदी स्कूल के खिलाफ नहीं है,
बल्कि हर उस स्कूल के लिए चेतावनी है
जो बच्चों की मानसिक पीड़ा, बुलिंग और सुरक्षा को नजरअंदाज करता है

एक मासूम बच्ची की मौत ने यह सिखा दिया कि

जब बच्चे बोलें, तो उन्हें सुना जाना चाहिए—
क्योंकि चुप्पी कभी-कभी जानलेवा साबित होती है।

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Author: Deepak Mittal

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