डिजिटल अरेस्ट नेटवर्क की जांच करेगी CBI, सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने दाखिल की स्टेटस रिपोर्ट

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नई दिल्ली: डिजिटल अरेस्ट से जुड़े मामलों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा लिए गए स्वतः संज्ञान मामले में केंद्र सरकार ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर दी है। इस मामले की मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है। केंद्र ने अदालत को बताया है कि डिजिटल अरेस्ट जैसे गंभीर साइबर अपराधों की जांच के लिए ठोस और समन्वित कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को अवगत कराया कि अदालत के 16 दिसंबर 2025 के आदेश के तहत दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर को अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दिया गया है। इसके बाद CBI ने 9 जनवरी को इस मामले में नई एफआईआर दर्ज की है। इसका उद्देश्य डिजिटल अरेस्ट से जुड़े पूरे नेटवर्क, अपराध के तरीके और इसके पीछे काम कर रहे गिरोहों की गहराई से जांच करना है।

स्टेटस रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार गृह मंत्रालय ने डिजिटल अरेस्ट की समस्या से निपटने के लिए एक हाई-लेवल इंटर-डिपार्टमेंटल कमेटी का गठन किया है। इस समिति की अध्यक्षता गृह मंत्रालय में आंतरिक सुरक्षा के विशेष सचिव कर रहे हैं। समिति में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, दूरसंचार विभाग, विदेश मंत्रालय, वित्तीय सेवा विभाग, कानून मंत्रालय, उपभोक्ता मामले मंत्रालय, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI), CBI, NIA, दिल्ली पुलिस और इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। I4C के सीईओ को समिति का मेंबर सेक्रेटरी बनाया गया है, जबकि अटॉर्नी जनरल भी नियमित रूप से बैठकों में शामिल हो रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, समिति की पहली बैठक 29 दिसंबर को हुई थी, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और एमिकस क्यूरी के सुझावों पर विस्तृत चर्चा की गई। इसके बाद 2 जनवरी को एमिकस क्यूरी के साथ एक विशेष बैठक आयोजित की गई, जिसमें दूरसंचार विभाग, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय, RBI और I4C के प्रतिनिधि शामिल थे। वहीं 6 जनवरी को गूगल, व्हाट्सऐप, टेलीग्राम और माइक्रोसॉफ्ट जैसे आईटी इंटरमीडियरीज के साथ भी अहम बैठक की गई।

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि सभी संबंधित विभागों से सुझाव लेकर डिजिटल अरेस्ट जैसी गंभीर साइबर समस्या से निपटने के लिए एक व्यापक और प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने हेतु उसे कम से कम एक महीने का समय दिया जाए। अब सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई में इस मामले पर आगे की दिशा तय की जाएगी।

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Author: Deepak Mittal

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