नई दिल्ली: केंद्रीय बजट 2026 पेश होने में अब कुछ ही दिन शेष हैं और इससे पहले ही उद्योग जगत की नजरें सरकार की नीतियों और प्राथमिकताओं पर टिकी हुई हैं। अलग-अलग सेक्टर से बजट को लेकर उम्मीदें सामने आ रही हैं। इसी कड़ी में जेटवर्क के को-फाउंडर और सीईओ अमृत आचार्य ने केंद्रीय बजट 2026 से जुड़ी अपनी अपेक्षाएं साझा की हैं।
आईएएनएस से बातचीत में अमृत आचार्य ने कहा कि केंद्र सरकार को यूनियन बजट 2026 में सार्वजनिक पूंजीगत खर्च को लगातार बढ़ाते रहना चाहिए। रेलवे, सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर और सोलर जैसी परियोजनाओं पर होने वाला सरकारी खर्च मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में मांग बढ़ाने का बड़ा जरिया बनता है। सरकार खुद एक बड़े खरीदार के रूप में काम करती है, जिससे घरेलू उद्योगों को सीधा लाभ मिलता है।
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से बजट में सार्वजनिक निवेश लगातार बढ़ा है और यही रफ्तार आगे भी बनी रहनी चाहिए। इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश से न केवल उद्योगों को ऑर्डर मिलते हैं, बल्कि रोजगार सृजन और आर्थिक गतिविधियों को भी मजबूती मिलती है।
अमृत आचार्य ने सरकार की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) नीति की सराहना करते हुए कहा कि इसने घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को नई दिशा दी है। इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर और ऑटो कंपोनेंट्स जैसे क्षेत्रों में पीएलआई के सकारात्मक परिणाम अब साफ तौर पर दिखने लगे हैं। उन्होंने कहा कि अब अगला कदम ‘मेक इन इंडिया फॉर इंडिया’ से आगे बढ़कर ‘मेक इन इंडिया फॉर ग्लोबल मार्केट’ की सोच अपनाने का होना चाहिए।
उन्होंने सुझाव दिया कि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सरकार को विशेष प्रोत्साहन योजनाएं लानी चाहिए, ताकि भारतीय कंपनियां वैश्विक बाजार में ज्यादा प्रतिस्पर्धी बन सकें। चीन का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां सरकार समर्थित बीमा और क्रेडिट स्कीम्स निर्यातकों को जोखिम से सुरक्षा देती हैं। भारत में भी ऐसी व्यवस्था की जरूरत है, जिससे निर्यातक अंतरराष्ट्रीय बाजारों में आत्मविश्वास के साथ काम कर सकें।
आचार्य ने यह भी कहा कि भारत में पूंजी की लागत अभी कई देशों के मुकाबले ज्यादा है। यदि सरकार इसे कम करने के लिए ठोस और योजनाबद्ध कदम उठाती है, तो निवेश और उद्यमिता को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने मौजूदा नीति व्यवस्था को सहयोगी, स्थिर और दूरदर्शी बताते हुए कहा कि सरकार उद्योग की बात सुनती है और लिए गए फैसलों पर कायम रहती है।
उन्होंने कहा कि आज भारत आईफोन समेत मोबाइल फोन का बड़ा निर्यातक बन चुका है और यह पीएलआई जैसी नीतियों के बिना संभव नहीं था। अब पीएलआई 2.0 के तहत सरकार असेंबली के साथ-साथ कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग पर भी जोर दे रही है, जिससे सोलर और अन्य उद्योगों को फायदा होगा।
अमृत आचार्य के मुताबिक, केंद्रीय बजट 2026 से उद्योग जगत की दो प्रमुख उम्मीदें हैं—सार्वजनिक पूंजीगत खर्च में निरंतर बढ़ोतरी और निर्यातकों के लिए विशेष प्रोत्साहन योजनाएं। उनका मानना है कि इन कदमों से भारत की मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को नई गति मिलेगी।
Author: Deepak Mittal










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