बिजली बिल में बड़ा बदलाव: यूपी में स्मार्ट प्रीपेड मीटर की लागत अब उपभोक्ताओं से वसूली जाएगी

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Deepak Mittal

उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ा बदलाव आने वाला है। राज्य सरकार और बिजली विभाग अब स्मार्ट प्रीपेड मीटर की लागत सीधे उपभोक्ताओं के बिजली बिल में जोड़कर वसूलने की तैयारी कर रहे हैं। यह कदम सरकार की “स्मार्ट मीटर” योजना को व्यापक रूप से लागू करने का हिस्सा है, लेकिन इससे लाखों उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

क्या है नया प्रावधान
बिजली विभाग के अनुसार, अब हर उपभोक्ता को स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगवाना अनिवार्य होगा। इन मीटरों की औसत कीमत लगभग ₹6,016 आंकी गई है, जिसे पहले विभाग खुद वहन कर रहा था। अब यह राशि धीरे-धीरे उपभोक्ताओं से वसूली जाएगी। मीटर की लागत को सीधे बिजली बिल में शामिल किया जाएगा, यानी उपभोक्ताओं के फिक्स चार्ज और एनर्जी चार्ज में इसका असर दिखेगा।

किश्तों में भुगतान की सुविधा
सरकार ने नई सुविधा के तहत उपभोक्ताओं को मीटर की कीमत एकमुश्त देने की बजाय किस्तों में भुगतान करने का विकल्प दिया है। उदाहरण के तौर पर, उपभोक्ता ₹160 प्रति माह या ₹1,000 की जमा राशि देकर हर महीने ₹125 की छोटी किश्तों में भुगतान कर सकते हैं। यह विकल्प उन लोगों के लिए सहायक है, जो पूरी राशि एक साथ नहीं चुका सकते।

पुराने मीटरों का बदलाव और विवाद
यूपी में पुराने और खराब स्मार्ट मीटरों को 2027 तक नए प्रीपेड मीटरों से बदला जाना है। इस प्रक्रिया में उपभोक्ताओं से अतिरिक्त शुल्क वसूलने की संभावना को लेकर विवाद भी बढ़ रहा है। कई उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्होंने पहले ही मीटर के लिए भुगतान किया था, ऐसे में फिर से शुल्क वसूलना अनुचित है।

स्मार्ट मीटर के फायदे
स्मार्ट प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं को 2% तक की छूट भी देता है यदि वे अग्रिम भुगतान करते हैं। इसके अलावा, उपभोक्ता अपने पुराने बिलों के साथ तुलना करके मीटर की सटीकता जान सकते हैं। मीटर रियल-टाइम खपत की जानकारी देता है और ऊर्जा उपयोग में पारदर्शिता सुनिश्चित करता है।

बकाया वसूली का नया तरीका
बिजली विभाग पुराने बकाया की वसूली के लिए नया सिस्टम लागू कर रहा है। उपभोक्ता पर बकाया राशि छोटे दैनिक शुल्कों के रूप में स्वतः काटी जाएगी। उदाहरण के लिए, ₹500 बकाया होने पर यह राशि उनके दैनिक रिचार्ज से घटती जाएगी।

उपभोक्ताओं की चिंता
सरकार का दावा है कि स्मार्ट मीटर ऊर्जा बचत और सटीक बिलिंग के लिए आवश्यक हैं। लेकिन आम उपभोक्ता चिंतित हैं कि मीटर की लागत जोड़ने से उनका मासिक बिल पहले से ज्यादा बढ़ जाएगा। घरों में पहले ही बिजली टैक्स, सरचार्ज और ट्रांसफॉर्मर शुल्क शामिल हैं, अब स्मार्ट मीटर की किश्तें इस भार को और बढ़ा सकती हैं।

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Author: Deepak Mittal

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