आरपार की लड़ाई: चौथे दिन मशाल जुलूस से गरजा दल्लीराजहरा

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आरपार की लड़ाई: चौथे दिन मशाल जुलूस से गरजा दल्लीराजहरा

“अब नहीं सहिबो, अधिकार लेकर रागिबो” की गूंज से हिला शहर – बीएसपी प्रबंधन पर बढ़ा दबाव

दल्लीराजहरा।राजहरा परिवहन संघ की लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुँच चुकी है। लगातार चौथे दिन धरना स्थल पर हजारों की भीड़ उमड़ी और मशाल जुलूस निकालकर यह साफ संदेश दे दिया गया कि अब संघर्ष आरपार का होगा। “अब नहीं सहिबो, अधिकार लेकर रागिबो” और “चाहे जो भी हो, अधिकार लेकर रहेंगे” के गगनभेदी नारों से पूरा शहर गूंज उठा।

धरना स्थल से निकला मशाल जुलूस जैन भवन चौक, गुप्ता चौक, पेट्रोल पंप चौक, माइंस ऑफिस चौक होते हुए वापस धरना स्थल पर समाप्त हुआ। भीड़ और नारों की गड़गड़ाहट से यह साफ हो गया कि इस बार परिवहन संघ पीछे हटने वाला नहीं है।

नेताओं और संगठनों का खुला समर्थन

धरना स्थल पर राजहरा व्यापारी संघ के पदाधिकारियों व सदस्यों सहित पहुँचे और आंदोलन को सही ठहराया।
छत्तीसगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स दल्लीराजहरा अध्यक्ष अमित कुकरेजा, नगर पालिका के पूर्व उपाध्यक्ष रवि जायसवाल, विधायक प्रतिनिधि रत्तीराम कोसमा समेत नगरवासी भी धरना स्थल पर शामिल हुए। सबने एक स्वर में कहा कि राजहरा परिवहन संघ की मांगें पूरी तरह जायज हैं और बीएसपी प्रबंधन अब और टालमटोल नहीं कर सकता।

20 सालों से अधूरी मांग, अब उबाल पर गुस्सा

परिवहन संघ के सदस्यों ने कहा कि बीस–बाइस वर्षों से लोह अयस्क और पैलेट परिवहन का कार्य माँगा जा रहा है, लेकिन बीएसपी प्रबंधन ने हमेशा नजरअंदाज किया।
संघ ने 20 अगस्त को बीएसपी प्रबंधन और प्रशासन को आवेदन दिया था जिसमें 27 अगस्त तक निराकरण की माँग की गई थी। चेतावनी के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसी कारण 28 अगस्त से धरना प्रदर्शन शुरू किया गया और 1 सितंबर से लोह अयस्क परिवहन को बाधित करने का ऐलान किया गया।

प्रशासन ने 29 अगस्त को पत्र जारी कर 1 सितंबर को दोपहर 12 बजे नगर पालिका सभागार में बैठक तय की है। संघ ने साफ कर दिया है कि बैठक का परिणाम ही तय करेगा कि आंदोलन थमेगा या फिर बीएसपी का लोह अयस्क परिवहन पूरी तरह ठप कर दिया जाएगा।

पुराने वादों पर क्यों बैठा धूल?

संघ ने बताया कि 28 जुलाई 2019 को हुई बैठक में स्पष्ट कहा गया था कि 15% लोह अयस्क परिवहन सड़क मार्ग से होगा और फाइल एमओई को भेज दी गई है। लेकिन 6 साल गुजर जाने के बाद भी यह मंजूरी “अंगद के पाँव” की तरह अटकी पड़ी है।
कलेक्टर, बीएसपी प्रबंधन, यहाँ तक कि खनिज साधन विभाग तक ने पत्र भेजे लेकिन नतीजा शून्य रहा। सांसद-विधायक से लेकर शासन तक गुहार लगाई गई, पर समाधान नहीं निकला। यही कारण है कि अब यह लड़ाई निर्णायक चरण में पहुँची है।

आंदोलन में उमड़ा जनसैलाब

धरना स्थल पर नगर पालिका उपाध्यक्ष मनोज दुबे, नरेंद्र सिंह तुली, अनिल सुथार, अशोक लोहिया, जगजीत सिंह मरवाहा, प्रदीप जायसवाल, संदीप शाहा, चरणजीत सिंह, संदीप बरमोटे, सुनील साहू, संजय विश्वकर्मा, देवेंद्र साहू, भागीराम साहू, दिलीप सिन्हा, शमीम खान, छोटेलाल गुप्ता, संतोष देवांगन, काकू रंधावा, सुनील जायसवाल, प्रदीप बरमोटे, विवेक, रंजीत सिंह समेत सैकड़ों की तादाद में लोग मौजूद रहे।

संघ का ऐलान –

“यह लड़ाई अब समझौते की नहीं, अधिकार की है।
बीएसपी प्रबंधन को झुकना ही पड़ेगा।
अगर 1 सितंबर की बैठक में ठोस नतीजा नहीं निकला तो पूरे क्षेत्र में लोह अयस्क परिवहन रोक दिया जाएगा और आंदोलन को प्रदेशव्यापी बनाया जाएगा।”

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Author: Deepak Mittal

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