
जांच रिपोर्ट से खुलासा, 300 परिवारों का सर्वे फर्जी, 415 करोड़ रुपये का हेरफेर..
अधिकारियों की मिलीभगत, घोटाले से राज्य सरकार को भारी नुकसान
(शैलेश शर्मा) : रायगढ़, छत्तीसगढ़: तमनार तहसील के बजरमुड़ा गांव का भूमि अधिग्रहण घोटाला राज्य के सबसे बड़े भूमि अधिग्रहण घोटालों में से एक बन चुका है। सिर्फ 300 परिवारों के प्रभावित होने के बावजूद अधिकारियों ने 415 करोड़ रुपये मुआवजे के रूप में बांटे।
जांच रिपोर्ट में तत्कालीन एसडीएम, तहसीलदार, आरआई, पटवारी सहित कई कर्मचारियों की संलिप्तता पाई गई है। जांच कमेटी ने इन पर दंडात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
सर्वेक्षण में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी
यह घोटाला तब उजागर हुआ जब दुर्गेश शर्मा नामक एक व्यक्ति ने इसकी शिकायत की। शुरुआती सर्वेक्षण में केवल 300 परिवारों को प्रभावित माना गया था, लेकिन बाद में यह संख्या बढ़ा दी गई।
अधिकारियों ने इस मुआवजे वितरण में गंभीर अनियमितताएं कीं, जिसमें करोड़ों रुपये फर्जी दस्तावेज़ों के आधार पर वितरित किए गए।
कोल ब्लॉक से जुड़े घोटालों का विस्तार
बजरमुड़ा घोटाले की शुरुआत तब हुई जब गारे पेलमा सेक्टर 3 के कोल ब्लॉक का आवंटन छत्तीसगढ़ सरकार की कंपनी सीएसपीडीसीएल को हुआ। इस अधिग्रहण के दौरान सर्वेक्षण में झूठी जानकारी देकर सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया गया।
इस घोटाले ने अन्य भूमि अधिग्रहण घोटालों को भी पीछे छोड़ दिया है, जिसमें एनटीपीसी लारा घोटाला और तलाईपाली रेल लाइन स्कैम शामिल हैं।
कार्रवाई की देरी और बढ़ती निराशा
चार महीने पहले पेश की गई जांच रिपोर्ट में अधिकारियों को दोषी ठहराए जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। सरकार इस मामले पर चुप है, जबकि प्रभावित लोग और शिकायतकर्ता न्याय की मांग कर रहे हैं। कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम को एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए गए हैं, लेकिन मामला लगातार दबाया जा रहा है।
सीबीआई जांच की तैयारी
शिकायतकर्ता दुर्गेश शर्मा ने अब इस मामले को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने की तैयारी कर ली है। उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाने की भी योजना बनाई है, जिससे राज्य के इस बड़े घोटाले की जांच राष्ट्रीय स्तर पर हो सके।
Author: Deepak Mittal










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