नई दिल्ली: मध्य-पूर्व में एक बार फिर युद्ध के बादल गहराते नजर आ रहे हैं। सऊदी अरब ने मंगलवार को यमन के अहम बंदरगाह शहर मुकल्ला पर जबरदस्त बमबारी कर दी। इस हमले का निशाना संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से भेजी गई हथियारों की एक बड़ी खेप थी, जिसे सऊदी अरब ने मिसाइल से उड़ा देने का दावा किया है।
सऊदी अरब का कहना है कि यह हथियार यमन की अलगाववादी ताकतों के लिए भेजे जा रहे थे। हमले के साथ ही सऊदी ने यूएई को कड़ी चेतावनी भी दी है, जिससे पूरे फारस की खाड़ी क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्ग के पास हमला, बढ़ा वैश्विक खतरा
यह हमला ऐसे इलाके में हुआ है, जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्ग के बेहद करीब स्थित है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना से न सिर्फ यमन बल्कि पूरे मध्य-पूर्व में सुरक्षा हालात बिगड़ सकते हैं। आशंका जताई जा रही है कि लंबे समय से थमे यमन के गृहयुद्ध की आग एक बार फिर भड़क सकती है।
UAE से निकला जहाज, STC के लिए हथियार उतारने का आरोप
सऊदी प्रेस एजेंसी के अनुसार, हमले के बाद जारी सैन्य बयान में कहा गया कि यह जहाज यूएई के फुजैराह बंदरगाह से रवाना हुआ था। आरोप है कि जहाज के चालक दल ने ट्रैकिंग सिस्टम निष्क्रिय कर दिया था और साउदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) की सेनाओं के लिए भारी मात्रा में हथियार और लड़ाकू वाहन उतारे जा रहे थे।
यमन का दस साल पुराना गृहयुद्ध फिर उफान पर?
यमन पिछले एक दशक से भी ज्यादा समय से गृहयुद्ध की आग में झुलस रहा है। ईरान समर्थित हूती विद्रोही राजधानी सना समेत देश के घनी आबादी वाले इलाकों पर काबिज हैं। वहीं, सऊदी अरब और यूएई के नेतृत्व वाला गठबंधन अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन करता रहा है।
हालांकि 2022 के बाद हिंसा में कमी आई थी, लेकिन अब यूएई समर्थित एसटीसी की बढ़ती गतिविधियों ने हालात फिर बिगाड़ दिए हैं। हाल ही में एसटीसी ने हदरामाउत और महरा प्रांतों पर कब्जा कर लिया है, जहां तेल से जुड़ी अहम सुविधाएं भी मौजूद हैं।
सहयोगी देशों के बीच ही टकराव, नई जंग की आशंका
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जो ताकतें हूती विद्रोहियों के खिलाफ एक ही खेमे में थीं, अब वही आपस में आमने-सामने आ गई हैं। सऊदी की इस कार्रवाई को यूएई समर्थित अलगाववादियों के खिलाफ सीधा संदेश माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अगर हालात पर जल्द काबू नहीं पाया गया, तो यमन एक बार फिर बड़े और खतरनाक युद्ध की ओर बढ़ सकता है, जिसका असर पूरे मध्य-पूर्व और वैश्विक व्यापार पर पड़ेगा।
Author: Deepak Mittal










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