लखनऊ: देश के अलग-अलग राज्यों में दूषित पेयजल अब एक जानलेवा खतरे के रूप में सामने आ रहा है। मध्यप्रदेश के इंदौर में जहां गंदे पानी से अब तक 15 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं अब उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा से भी डराने वाली खबर सामने आई है। यहां दूषित पानी पीने से कई लोग अचानक बीमार पड़ गए, जिससे इलाके में दहशत और आक्रोश फैल गया।
एक साथ बीमार पड़े कई परिवार
जानकारी के अनुसार 6 और 7 जनवरी को ग्रेटर नोएडा के डेल्टा-1 सेक्टर में रहने वाले छह परिवारों में अचानक उल्टी, दस्त और तेज बुखार के लक्षण सामने आए। पीड़ितों का आरोप है कि सी-ब्लॉक इलाके में सीवेज ओवरफ्लो हो रहा था और पानी की पाइपलाइन में लीकेज के कारण गंदा पानी घरों तक पहुंच गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नलों से आने वाले पानी में दुर्गंध और गंदगी साफ महसूस की जा सकती थी, लेकिन शिकायतों के बावजूद शुरुआत में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
GNIDA का इनकार, कहा—पानी पूरी तरह साफ
वहीं ग्रेटर नोएडा इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (GNIDA) ने इन आरोपों को खारिज किया है। अधिकारियों का कहना है कि पीने के पानी की सप्लाई में सीवेज की कोई मिलावट नहीं पाई गई।
GNIDA के अनुसार, पानी के सैंपल की जांच कराई गई, जो पूरी तरह साफ पाए गए।
एक अधिकारी ने बताया कि जांच के दौरान एक घर में कनेक्शन की समस्या और दूसरे घर में लीकेज मिली थी, जिसे तत्काल ठीक कर दिया गया।
मेडिकल कैंप में पहुंचे मरीज, इलाज जारी
दूसरी ओर, गौतम बुद्ध नगर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) नरेंद्र कुमार ने पुष्टि की कि डेल्टा-1 इलाके में फ्री मेडिकल कैंप लगाया गया।
उन्होंने बताया कि कैंप में उल्टी-दस्त से पीड़ित सात मरीजों का इलाज किया गया है और सभी की स्थिति फिलहाल स्थिर है।
सवाल वही—अगर पानी साफ था, तो लोग बीमार क्यों?
इंदौर की दर्दनाक घटनाओं के बाद ग्रेटर नोएडा की यह खबर कई सवाल खड़े कर रही है।
क्या सच में पानी साफ था, या फिर कहीं न कहीं सिस्टम की बड़ी चूक सामने आ रही है?
Author: Deepak Mittal










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