2 हफ्ते बाद फिर उत्तराखंड में बादल फटने से भयानक तबाही, धराली के बाद थराली में दिखा दिल दहलाने वाला मंजर

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Deepak Mittal

ई दिल्‍ली :उत्तराखंड में बादल फटने का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। बीते 5 अगस्‍त को धराली में भयानक आपदा के बाद अब शुक्रवार देर रात चमोली जिले में एक बार फिर बादलों ने कहर बरपाया है।

थराली क्षेत्र में एक ही रात में तीन जगह बादल फटने की घटना ने पूरे इलाका दहल गया। रात करीब 1:30 बजे अचानक तेज बारिश के बीच पहाड़ों से मलबा और पानी का सैलाब बहकर कस्बे और गांवों में घुस आया। देखते ही देखते सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, तहसील परिसर, तमाम मकान, दुकानें और वाहन मलबे में दब गए। लोगों ने घबराकर अपने घरों से भागकर जैसे-तैसे जान बचाई। इस त्रासदी ने सभी को एक बार फिर 16 दिन पहले धराली में आई आपदा की याद दिला दी।

तबाही का मंजर और चीख-पुकार
राडीबगड़, चेपड़ो और सागवाड़ा में सबसे अधिक नुकसान हुआ है। कई गौशालाएं और दुकानें मलबे में समा गईं। चेपड़ो बाजार में एक व्यक्ति लापता है और कई लोग गंभीर रूप से घायल हैं। सबसे दर्दनाक घटना सगबाड़ा गांव में हुई, जहां भारी मलबे के बीच प्रधान नरेंद्र सिंह की बेटी कविता दब गई। अचानक आई इस तबाही से लोग चीखते-चिल्लाते घरों से बाहर भागे, पर मलबे और पत्थरों ने पूरे कस्बे को हिलाकर रख दिया। दर्जनों परिवार बेघर हो गए और कई दुकानदारों का जीवनभर की कमाई मलबे में दब गई।

राहत-बचाव कार्य जारी
सेना, पुलिस, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें राहत और बचाव कार्यों में जुटी हुई हैं। जिलाधिकारी संदीप तिवारी स्वयं मौके पर मौजूद रहकर हालात का जायजा ले रहे हैं। तहसील परिसर और एसडीएम आवास तक मलबा घुस गया है, कई वाहनों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए नदी किनारे बसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया। चमोली जिले में कक्षा 1 से 12 तक के सभी विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों को बंद कर दिया गया है।

लोगों में दहशत बरकरार
इस भयावह रात के बाद पूरे क्षेत्र में गम और दहशत का माहौल है। हर आंख में खौफ है कि न जाने कब फिर पहाड़ टूट पड़ेगा। लोग अब भी लापता लोगों की तलाश और अपने उजड़े घरों को देखकर आंसू बहा रहे हैं। लेकिन राहत की बात यह है कि प्रशासन लगातार हालात पर नज़र बनाए हुए है और राहत-बचाव कार्य तेज़ी से चल रहे हैं। स्थानीय लोग भी मदद के लिए आगे आए हैं। कुदरत के इस कहर ने एक बार फिर दिखा दिया कि उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों के लिए बादल फटना कितना विनाशकारी साबित हो सकता है और ऐसे हादसों में जान माल की सुरक्षा के उपाय हर स्‍तर पर किए जाने की जरूरत है।

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Author: Deepak Mittal

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