नई दिल्ली। भारत ने एक बार फिर पड़ोसी देशों के संकट में अपनी मानवीय प्रतिबद्धता को दोहराया है। पिछले कुछ दिनों में भारत ने अफगानिस्तान को 73 टन जरूरी चिकित्सा और राहत सामग्री भेजी है, जबकि श्रीलंका में भारी बारिश और बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए भारतीय वायुसेना का सी-130जे सुपर हरक्यूलिस विमान राहत सामग्री लेकर कोलंबो पहुंचा।
दोनों अभियानों में भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति और मानवीय सहायता की परंपरा स्पष्ट झलक रही है। इस मदद के लिए अफगानिस्तान और श्रीलंका के लोग भारत की तारीफ करते नहीं थक रहे। अफगानिस्तान के एक नागिरक ने लिखा, “एक ही दिल है कितनी बार जीतोगे डियर इंडिया..?
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भारत ने अफगानिस्तान को क्या भेजा
भारत ने अफगानिस्तान के लिए 73 टन राहत सामग्री भेजी। इसमें जीवन रक्षक दवाएं, कोविड-19 वैक्सीन, एंटी-वायरल दवाएं, सर्जिकल उपकरण, अस्पतालों के लिए जरूरी दवाइयां और अन्य चिकित्सा सामग्री शामिल है। यह मदद विशेष रूप से काबुल और कंधार के अस्पतालों के लिए भेजी गई है, जहां स्वास्थ्य सेवाएं पहले से ही कमजोर हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह सहायता अफगानिस्तान के लोगों के प्रति भारत की निरंतर प्रतिबद्धता का हिस्सा है। पिछले चार वर्षों में भारत ने अफगानिस्तान को 50,000 टन गेहूं, 400 टन से अधिक दवाएं और कई बार वैक्सीन की खेपें भेजी हैं। तालिबान शासन के बावजूद भारत ने हमेशा यह स्पष्ट किया है कि उसकी मदद सीधे अफगान जनता के लिए है, न कि किसी राजनीतिक समूह के लिए।
श्रीलंका के बाढ़ पीड़ितों को भारत की बड़ी मदद
दूसरी ओर श्रीलंका में पिछले हफ्ते से हो रही भारी बारिश और बाढ़ से हजारों लोग प्रभावित हुए हैं। कई इलाकों में घर डूब गए, सड़कें टूट गईं और लोग खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। इस आपदा में भारत ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। भारतीय वायुसेना के सी-130जे विमान ने कोलंबो पहुंचकर 15 टन से अधिक राहत सामग्री सौंपी। इसमें टेंट, तारपोलीन शीट्स, कंबल, हाईजीन किट, पानी शुद्ध करने की गोलियां, सोलर लैंप और अन्य जरूरी सामान शामिल हैं। यह मदद श्रीलंका के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन केंद्र को सौंपी गई है, जो प्रभावित इलाकों में इसका वितरण करेगा।
भारत पड़ोसियों के सुख-दुख में हमेशा साथ
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, ‘भारत अपने पड़ोसियों के दुख-दर्द में हमेशा साथ खड़ा रहा है। चाहे भूकंप हो, सुनामी हो या बाढ़, भारत ने हमेशा सबसे पहले मदद पहुंचाई है।’ श्रीलंका के साथ भारत के विशेष संबंध हैं और 2022 के आर्थिक संकट के दौरान भी भारत ने 4 बिलियन डॉलर से अधिक की मदद की थी।ये दोनों अभियान दक्षिण एशिया में भारत की सॉफ्ट पावर और विश्वसनीय पड़ोसी की छवि को और मजबूत करते हैं। जब दुनिया के बड़े देश अपनी सीमाओं में व्यस्त हैं, तब भारत बिना शर्त और बिना भेदभाव के मानवीय मदद पहुंचा रहा है।
Author: Deepak Mittal










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