199 दवा नमूने गुणवत्ता जांच में फेल, दिल की दवा में बेहद कम मिली सक्रिय सामग्री

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नई दिल्ली। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की जुलाई की दवा गुणवत्ता जांच में 199 दवा नमूने मानक गुणवत्ता पर खरे नहीं उतरे। जांच में कई नामी कंपनियों समेत अलग-अलग निर्माताओं की दवाओं में सक्रिय औषधीय पदार्थ की मात्रा, घुलने, पहचान और अन्य गुणवत्ता मानकों से जुड़ी खामियां सामने आई हैं।

जांच में सबसे गंभीर मामला क्लोपिडोग्रेल और एस्पिरिन की संयुक्त दवा का सामने आया। फार्मारूट्स हेल्थकेयर, हिमाचल प्रदेश के एक नमूने में क्लोपिडोग्रेल की मात्रा केवल 38.20 प्रतिशत और एस्पिरिन की मात्रा 21.8 प्रतिशत पाई गई। नमूने में गोली के ठीक से घुलने और फ्री सैलिसिलिक एसिड से जुड़ी गड़बड़ी भी मिली। जेएम लेबोरेटरीज के इसी संयोजन वाले एक अन्य नमूने में एस्पिरिन 77.13 प्रतिशत और फ्री सैलिसिलिक एसिड 12.01 प्रतिशत पाया गया।

समय फार्मा इंडिया की आर-जारा डीएसआर कैप्सूल में 20 मिलीग्राम रैबेप्राजोल और 30 मिलीग्राम डोमपेरीडोन होने का दावा था, लेकिन जांच में दोनों ही सक्रिय घटकों की मात्रा 0.0 मिलीग्राम पाई गई। वहीं, डिवाइन मेडिकेयर की 300 मिलीग्राम प्रेगाबालिन कैप्सूल में केवल 211.16 मिलीग्राम दवा मिली। एमके हेल्थकेयर की 100 मिलीग्राम इट्राकोनाजोल में 63.54 मिलीग्राम तथा रेल्टसेन हेल्थकेयर की 5 मिलीग्राम रामिप्रिल में सक्रिय पदार्थ 64.20 प्रतिशत पाया गया।

जुलाई की सूची में जैक्सन लेबोरेटरीज का ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन भी शामिल है। जांच में इसकी पहचान संबंधी परीक्षण मानक पर खरा नहीं उतरा। इसके अलावा पैंटोप्राजोल और ओमेप्राजोल की कई दवाएं घुलने की जांच में विफल रहीं।

जांच में लुपिन, सनोफी इंडिया, जायडस हेल्थकेयर, आईपीका लेबोरेटरीज, मैक्लियोड्स फार्मास्यूटिकल्स, ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन फार्मास्यूटिकल्स और कैडिला फार्मास्यूटिकल्स जैसी कंपनियों के कुछ उत्पाद भी मानक पर खरे नहीं उतरे। एक नमूने को जांच में नकली घोषित किया गया। वहीं, डायबिटिस-ऑल पाउडर में पियोग्लिटाजोन की मौजूदगी पाई गई, जो उत्पाद के दावे से मेल नहीं खाती थी।

जेएमएच फार्मा की डिओमैक्स-एलबी में 250 मिलीग्राम वाली दवा के मुकाबले अमॉक्सिसिलिन केवल 10.86 मिलीग्राम और क्लोक्सासिलिन 67.73 मिलीग्राम पाया गया। कुछ सेफिक्सिम और अमॉक्सिसिलिन-क्लैवुलैनिक एसिड वाली दवाओं में भी मात्रा, घुलने और पहचान संबंधी कमियां मिलीं।

बुखार और दर्द में आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली पैरासिटामोल की दवाएं भी जांच में विफल रहीं। क्योरटेक फॉर्म्युलेशंस, जेनिथ ड्रग्स और अलवेंटा फार्मा के नमूनों में घुलने से जुड़ी समस्या मिली। विवेक फार्माकेम के बच्चों के लिए बनाए गए पैरासिटामोल सिरप में सूक्ष्मजीव संबंधी जांच में खामी सामने आई।


सीडीएससीओ की जांच में सामने आई ये खामियां दवाओं की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। खासतौर पर उन दवाओं में सक्रिय पदार्थ की बेहद कम या शून्य मात्रा मिलना चिंताजनक है, जिनका इस्तेमाल हृदय रोग, संक्रमण, मधुमेह, पेट की बीमारी और दर्द-बुखार जैसी सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं के उपचार में किया जाता है।

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Author: Deepak Mittal

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