बालोद। गुरूर थाना क्षेत्र में नवविवाहिता की मृत्यु के बहुचर्चित मामले में गुरूर पुलिस ने दहेज प्रताड़ना के आरोप में पति, सास, ससुर और ननंद को गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया, जहां से चारों आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। गंभीर एवं संवेदनशील इस प्रकरण की संपूर्ण विवेचना राजपत्रित अधिकारी अनुविभागीय पुलिस अधिकारी (एसडीओपी) माया वर्मा द्वारा की गई, जबकि थाना प्रभारी मुकेश सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया।
पुलिस की इस निष्पक्ष एवं साक्ष्य आधारित कार्रवाई की क्षेत्रभर में सराहना हो रही है।
पुलिस अधीक्षक योगेश कुमार पटेल ने नवविवाहिता की मृत्यु के मामले को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष एवं गहन जांच के निर्देश दिए थे। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मोनिका ठाकुर के मार्गदर्शन में संपूर्ण विवेचना की जिम्मेदारी एसडीओपी माया वर्मा को सौंपी गई। राजपत्रित अधिकारी होने के नाते उन्होंने पूरे प्रकरण के प्रत्येक पहलू की गंभीरता से जांच कराई तथा सभी तथ्यों और साक्ष्यों का सूक्ष्म परीक्षण किया।
जांच में सामने आया कि गुरूर की गुलमोहर कॉलोनी स्थित किराये के मकान में रहने वाली नवविवाहिता ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। प्रारंभिक कार्रवाई के बाद एसडीओपी माया वर्मा ने मामले की विस्तृत विवेचना करते हुए विवाह के बाद की परिस्थितियों, पारिवारिक संबंधों, मृतिका के मायके पक्ष के कथनों, तकनीकी साक्ष्यों तथा अन्य सभी तथ्यों की गहन जांच कराई।

विवेचना के दौरान कार्यपालिक मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में आवश्यक कानूनी कार्रवाई की गई। साइबर सेल बालोद की सहायता से मोबाइल कॉल विवरण प्राप्त किए गए। मृतिका के माता-पिता, भाई, बहन तथा अन्य सामाजिक व्यक्तियों के बयान दर्ज किए गए। जांच में यह तथ्य सामने आया कि विवाह के बाद मृतिका को दहेज, रंग-रूप तथा अन्य बातों को लेकर लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था। इस प्रताड़ना से आहत होकर उसने आत्मघाती कदम उठाया।

एसडीओपी माया वर्मा ने उपलब्ध मौखिक, दस्तावेजी, परिस्थितिजन्य एवं तकनीकी साक्ष्यों का गहन परीक्षण कर पर्याप्त प्रमाण पाए, जिसके आधार पर संबंधित धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया। अपराध दर्ज होने के बाद थाना प्रभारी मुकेश सिंह ने पुलिस टीम के साथ तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपियों को अभिरक्षा में लिया। पूछताछ एवं उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर चारों आरोपियों को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।

पूरे प्रकरण की विवेचना में एसडीओपी माया वर्मा की महत्वपूर्ण एवं निर्णायक भूमिका रही। वहीं आरोपियों की गिरफ्तारी एवं संपूर्ण पुलिस कार्रवाई में थाना प्रभारी मुकेश सिंह, सहायक उपनिरीक्षक कुलेश्वर यादव, प्रशिक्षु उपनिरीक्षक वीणा मरावी, आरक्षक पिताम्बर निषाद, विवेक सिन्हा एवं कोमल साहू का सराहनीय योगदान रहा।
एसडीओपी माया वर्मा ने कहा कि महिला संबंधी अपराधों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रत्येक मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी एवं साक्ष्य आधारित विवेचना कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
वहीं थाना प्रभारी मुकेश सिंह ने कहा कि गुरूर पुलिस महिला सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाने तथा अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई के लिए पुलिस पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करती रहेगी।
Author: Deepak Mittal









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