SIR प्रक्रिया पूरी तरह से वैधानिक, स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव EC का संवैधानिक दायित्व : सुप्रीम कोर्ट

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सुप्रीम कोर्ट ने SIR की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर आज (बुधवार को) अहम फैसला सुनाया। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ याचिकाओं के एक बैच पर ये फैसला सुनाया।

सर्वोच्च अदालत ने ये तय किया कि क्या चुनाव आयोग के पास मौजूदा रूप में SIR करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 326, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और उसके तहत बनाए गए नियमों के तहत शक्तियां हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह कहना गलत है कि SIR कराकर चुनाव आयोग ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर काम किया है। मतदाता सूची को अपडेट करना स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव का हिस्सा है।

ये आयोग का संवैधानिक दायित्व है। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि केवल इस आधार पर SIR की कार्रवाई को कानून के खिलाफ नहीं कहा जा सकता कि इसकी प्रक्रिया सामान्य वोटर वेरिफिकेशन प्रक्रिया से भिन्न है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि SIR की प्रकिया में कोई गलती नहीं है। लोगों को अपनी जानकारी जोड़ने, सुधार करने और आपत्ति/अपील करने के कई मौके दिए गए। अगर मतदाताओं से SIR के दौरान अपने दस्तावेज या जानकारी देने के लिए कहा जाता है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि उनको नागरिक नहीं माना जा रहा है।

निष्पक्ष चुनाव सिर्फ वोट डालने की प्रक्रिया तक सीमित नहीं होते। उनका सबसे महत्वपूर्ण आधार सही, भरोसेमंद और सटीक वोटर लिस्ट होती है। ऐसे में वोटर लिस्ट को अपडेट करना गलत नहीं माना जा सकता।

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Author: Deepak Mittal

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