17 वर्षों की नक्सल सेवा, 2000 पौधों का संकल्प और जनसेवा की मिसाल प्रेस क्लब बालोद ने किया ओमप्रकाश सेन का सम्मान

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बालोद। जिला मुख्यालय के ग्राम तरौद निवासी ओमप्रकाश सेन आज एक ऐसे नाम बन चुके हैं, जिनकी पहचान केवल एक पुलिस अधिकारी तक सीमित नहीं, बल्कि जनसेवा, वीरता और पर्यावरण संरक्षण के मजबूत प्रतीक के रूप में स्थापित हो चुकी है। वर्ष 2007 में आरक्षक पद पर भर्ती होकर अपने कर्तव्य, साहस और समर्पण के दम पर उप पुलिस अधीक्षक के पद तक पहुंचे सेन ने अपने पूरे कार्यकाल में जनता का विश्वास जीता है।


करीब 17 वर्षों तक नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सेवा देना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन ओमप्रकाश सेन ने इस चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी को केवल ड्यूटी नहीं, बल्कि मिशन के रूप में निभाया। इस दौरान उन्होंने कानून व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ जरूरतमंद लोगों की हर संभव मदद की। वे बिना किसी प्रचार-प्रसार के गरीबों तक आवश्यक सामग्री पहुंचाते रहे और संकट के समय हमेशा लोगों के साथ खड़े नजर आए।


हाल ही में उनकी तत्परता और मानवता का एक और उदाहरण सामने आया, जब आग से झुलसी एक महिला की जान बचाने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई। यह घटना उनके संवेदनशील और जिम्मेदार व्यक्तित्व को और भी मजबूत बनाती है।
पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय है।

ओमप्रकाश सेन अब तक लगभग 2000 पौधे लगा चुके हैं, जिनमें बरगद, पीपल और बेल जैसे महत्वपूर्ण वृक्ष शामिल हैं। उनका यह अभियान आज भी लगातार जारी है। इसके साथ ही वे पशु-पक्षियों के लिए पानी और चारा की व्यवस्था कर समाज में जीवों के प्रति संवेदनशीलता का संदेश दे रहे हैं।


मूलतः गुरुर ब्लॉक के ग्राम नवागांव के निवासी सेन वर्तमान में ग्राम तरौद में निवासरत हैं। उनके परिवार में भी सेवा की भावना स्पष्ट झलकती है, जहां उनकी धर्मपत्नी ग्राम पंचायत में सचिव के रूप में कार्यरत हैं। वर्ष 2017 और 2021 में राष्ट्रपति वीरता पुरस्कार से सम्मानित हो चुके सेन अपनी इस उपलब्धि का श्रेय माता-पिता, गुरुजनों, पत्नी और वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन को देते हैं।


ओमप्रकाश सेन का कहना है कि पुलिस की वर्दी उनके लिए केवल जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रति सेवा का अवसर है। उन्होंने कहा कि नक्सल क्षेत्रों में बिताए गए वर्षों ने उन्हें जीवन का असली उद्देश्य समझाया लोगों की मदद करना।

उन्होंने बताया कि पौधारोपण का अभियान उन्होंने प्रकृति को लौटाने की भावना से शुरू किया, जिसे आगे भी जारी रखेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी जरूरतमंद की मदद करना ही उनके लिए सबसे बड़ा संतोष है और आगे भी वे इसी भावना के साथ काम करते रहेंगे।


इसी क्रम में प्रेस क्लब बालोद के सदस्यों ने उनके निवास पहुंचकर उनका सम्मान किया।

इस दौरान अध्यक्ष प्रदीप चोपड़ा ने कहा कि ओमप्रकाश सेन जैसे अधिकारी समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं और उनकी कार्यशैली युवाओं को सकारात्मक दिशा देती है।

संरक्षक दीपक मित्तल ने कहा कि ओमप्रकाश सेन ने अपने कार्यों से यह साबित कर दिया है कि वर्दी केवल अधिकार का प्रतीक नहीं, बल्कि सेवा और समर्पण का माध्यम है। उन्होंने कहा कि नक्सल क्षेत्रों में 17 वर्षों तक सेवा देना, हजारों पौधे लगाना और हर जरूरतमंद के साथ खड़ा रहना ये सभी कार्य एक असाधारण व्यक्तित्व की पहचान हैं। मित्तल ने आगे कहा कि ऐसे अधिकारी समाज में विश्वास और सुरक्षा की भावना को मजबूत करते हैं और युवाओं के लिए एक आदर्श प्रस्तुत करते हैं।

अजय बाफना ने उनके सामाजिक कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि पर्यावरण और जनसेवा के क्षेत्र में उनका योगदान अनुकरणीय है।


वहीं ताराचंद साहू ने कहा कि सेन का जीवन संघर्ष, साहस और सफलता की प्रेरक कहानी है, जो हर वर्ग के लोगों को आगे बढ़ने की सीख देती है।


कार्यक्रम में सरपंच धर्मेंद्र रामटेके सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। सभी ने एक स्वर में कहा कि ओमप्रकाश सेन जैसे व्यक्तित्व समाज के लिए गर्व का विषय हैं और उनके कार्य आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बनेंगे।

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Author: Deepak Mittal

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