नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट सोमवार (23 फरवरी) को टेक्नोलॉजी कंपनियों Meta Platforms और WhatsApp की उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) द्वारा लगाए गए 213.14 करोड़ रुपये के जुर्माने को चुनौती दी गई है।
CCI ने व्हाट्सऐप की प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर यह जुर्माना लगाया था। आयोग का आरोप था कि कंपनी ने अपनी नई नीति के तहत 5 वर्षों तक विज्ञापन उद्देश्यों के लिए यूज़र डेटा को अपनी पेरेंट कंपनी मेटा के साथ साझा करने का प्रावधान रखा, जो प्रतिस्पर्धा कानूनों का उल्लंघन है।
NCLAT ने हटाया था बैन, बरकरार रखा जुर्माना
इस मामले में नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने कंपनियों की अपील पर सुनवाई करते हुए CCI द्वारा लगाए गए प्रतिबंध (बैन) को हटा दिया था, लेकिन 213 करोड़ रुपये का जुर्माना बरकरार रखा। ट्रिब्यूनल ने माना कि व्हाट्सऐप की प्राइवेसी और सहमति नीति विज्ञापन और गैर-विज्ञापन दोनों उद्देश्यों के लिए यूज़र डेटा संग्रह पर लागू होती है।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
इससे पहले 3 फरवरी को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कंपनियों को कड़ी फटकार लगाते हुए ‘डेटा शेयरिंग के नाम पर नागरिकों की निजता के अधिकार से खिलवाड़’ करने की टिप्पणी की थी। कोर्ट ने यह भी कहा था कि कंपनियां बाजार में एकाधिकार (मोनोपॉली) की स्थिति बना रही हैं।
9 फरवरी की सुनवाई में अदालत ने केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को भी इस मामले में पक्षकार के रूप में शामिल होने का निर्देश दिया था।
अब शीर्ष अदालत CCI की उस अपील पर सुनवाई कर रही है, जिसमें NCLAT के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें व्हाट्सऐप और मेटा को यूज़र डेटा साझा करने की अनुमति दी गई थी।
मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ के समक्ष होगी।
Author: Deepak Mittal









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