ग्वालियर: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने दतिया के जंगलों में विदेशी महिला पर्यटक से सामूहिक दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे दोषियों को राहत देने से इनकार कर दिया है। दोषियों ने सजा निरस्त करने के लिए हाईकोर्ट में अपील दायर की थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मामले को अत्यंत गंभीर बताते हुए कहा कि यह अपराध केवल पीड़िता के शरीर पर नहीं, बल्कि उसके मन, मस्तिष्क और आत्मा पर गहरा आघात है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि जब कोई विदेशी महिला भारत की संस्कृति को जानने-समझने के उद्देश्य से यहां आती है और उसके साथ इस प्रकार की घटना होती है, तो अपराध की गंभीरता और बढ़ जाती है।
क्या है पूरा मामला
घटना मार्च 2013 की है। स्विट्जरलैंड का एक दंपति साइकिल से भारत भ्रमण पर निकला था। 15 मार्च को वे दतिया पहुंचे और झारिया गांव के जंगल में टेंट लगाकर ठहरे। इसी दौरान रात में 7-8 बदमाश वहां पहुंचे। आरोपियों ने पति को बंधक बना लिया और महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। वारदात के बाद आरोपियों ने दंपति का कीमती सामान भी लूट लिया।
मामले में पुलिस ने आधा दर्जन से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार किया था। सभी के खिलाफ गैंगरेप, लूट समेत विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया। अधीनस्थ न्यायालय ने छह आरोपियों—रामप्रीत, ऋषि, भूरा, बृजेश और विष्णु समेत अन्य को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
फिलहाल सभी दोषी सजा काट रहे हैं। हाईकोर्ट द्वारा अपील खारिज किए जाने के बाद उनकी सजा बरकरार रहेगी।
Author: Deepak Mittal










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