बिलासपुर: शिक्षक युक्तियुक्तकरण के दौरान एक महिला शिक्षिका की पदस्थापना से जुड़े मामले में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) के खिलाफ कड़ी टिप्पणी की है। न्यायालय ने डीईओ को 11 फरवरी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए हैं।
मामले के अनुसार, चित्ररेखा तिवारी शासकीय कन्या माध्यमिक शाला, तारबहार में प्रधानपाठिका के पद पर पदस्थ थीं। शिक्षक युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया के तहत उनका स्थानांतरण शासकीय माध्यमिक शाला, गतौरा (मस्तूरी विकासखंड) किया गया था। हालांकि, उस विद्यालय में पहले से ही एक प्रधानपाठक पदस्थ होने के कारण चित्ररेखा तिवारी को अपनी पुरानी शाला में ही कार्य करना पड़ा।
इस स्थिति को देखते हुए शिक्षिका का अभ्यावेदन स्वीकार किया गया और उन्हें अन्यत्र पदस्थ किए जाने की बात कही गई, लेकिन लंबे समय तक कोई आदेश जारी नहीं हुआ। मानसिक रूप से परेशान होकर चित्ररेखा तिवारी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की, जो 31 जनवरी को पंजीबद्ध हुई।
याचिका दायर होने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जल्दबाजी में एक नया पदस्थापना आदेश जारी किया गया, जिसमें शिक्षिका को शासकीय माध्यमिक शाला, फरहदा में पदस्थ दर्शाया गया। शासन पक्ष ने अदालत को बताया कि यह आदेश 30 जनवरी को जारी किया गया था। जब यह आदेश न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया, तो याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने इस पर आपत्ति दर्ज कराई।
6 फरवरी को हुई सुनवाई के दौरान अधिवक्ता ने अदालत का ध्यान इस तथ्य की ओर दिलाया कि याचिका में वही केस नंबर अंकित है, जो 31 जनवरी को पंजीबद्ध हुआ था, जबकि पदस्थापना आदेश को 30 जनवरी का बताया जा रहा है। इससे यह स्पष्ट हुआ कि आदेश बैकडेट में तैयार किया गया और न्यायालय को गुमराह करने का प्रयास किया गया।
इस पर हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे को 11 फरवरी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया कि बैकडेट आदेश क्यों जारी किया गया और उसे अदालत के समक्ष क्यों प्रस्तुत किया गया।
Author: Deepak Mittal










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