Lifestyle: वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) के अनुसार, दुनियाभर में कोलन कैंसर के मरीजों और इससे होने वाली मौतों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2020 में करीब 9.30 लाख लोगों की मौत कोलन कैंसर के कारण हुई, जबकि लगभग 1.9 मिलियन नए मामले सामने आए थे। संगठन का अनुमान है कि 2040 तक ये आंकड़े और भी डरावने हो सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कोलन कैंसर का समय रहते पता चलना बेहद जरूरी है, लेकिन इसके शुरुआती लक्षण इतने हल्के होते हैं कि लोग अक्सर इन्हें सामान्य पाचन समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।
पाचन तंत्र में बदलाव हैं शुरुआती संकेत
कोलन कैंसर के शुरुआती चरणों में कब्ज, लगातार दस्त, मल के स्वरूप में बदलाव जैसे लक्षण देखने को मिल सकते हैं। आंत में ट्यूमर के बढ़ने के कारण ये समस्याएं अस्थायी न रहकर स्थायी भी हो सकती हैं। इसके अलावा अगर मल में लाल खून या गहरे रंग का मल दिखाई दे, तो इसे बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क कर जरूरी जांच कराना जरूरी है।
बिना कारण वजन कम होना भी चेतावनी
अगर बिना डाइट या एक्सरसाइज में बदलाव किए 10 पाउंड या उससे अधिक वजन अचानक कम हो जाए, तो यह भी कोलन कैंसर का शुरुआती संकेत हो सकता है। कुपोषण, पाचन में गड़बड़ी और शरीर में ऊर्जा की असामान्य खपत इसके कारण हो सकते हैं। साथ ही पर्याप्त नींद लेने के बावजूद लगातार थकान महसूस होना भी एक अहम लक्षण है। अंदरूनी ब्लीडिंग के चलते आयरन की कमी और एनीमिया हो सकता है, जिससे कमजोरी और थकावट बनी रहती है।
कम उम्र के लोग भी हो रहे हैं प्रभावित
डॉक्टरों के मुताबिक अब कम उम्र में कोलन कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इसलिए पेट दर्द, मल में खून, पाचन में बदलाव जैसे लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए। कई लोग इन्हें सामान्य पेट की समस्या समझकर गलत इलाज करा लेते हैं, जिससे बीमारी गंभीर हो जाती है।
नियमित जांच है जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि जिन लोगों में आनुवंशिक रूप से कोलन कैंसर का खतरा है, उन्हें नियमित रूप से स्क्रीनिंग टेस्ट करवाना चाहिए। डॉक्टर यह भी सलाह देते हैं कि 45–50 साल से कम उम्र के लोग भी अगर ऐसे लक्षण महसूस करें, तो जांच में देरी न करें। समय पर पहचान और सही इलाज से कोलन कैंसर को काफी हद तक काबू में किया जा सकता है।
Author: Deepak Mittal










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