कम उम्र में सफेद हो रहे बाल? जीन, तनाव और खानपान बन रहे हैं बड़ी वजह

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नई दिल्ली: बालों का सफेद होना अब सिर्फ बढ़ती उम्र की निशानी नहीं रह गई है। बदलती जीवनशैली के दौर में कम उम्र के लोगों में भी सफेद बालों की समस्या तेजी से बढ़ रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक इसके पीछे आनुवंशिक कारण, मानसिक तनाव, पोषण की कमी और गलत जीवनशैली अहम भूमिका निभा रहे हैं।

विज्ञान के अनुसार, बालों का रंग एक प्राकृतिक पिगमेंट मेलेनिन से तय होता है। यह पिगमेंट बालों की जड़ों में मौजूद विशेष कोशिकाओं द्वारा बनाया जाता है। जब तक ये कोशिकाएं सक्रिय रहती हैं, बालों का रंग प्राकृतिक बना रहता है। लेकिन उम्र बढ़ने के साथ-साथ ये कोशिकाएं कमजोर होने लगती हैं और मेलेनिन का उत्पादन कम हो जाता है। इसका नतीजा यह होता है कि बाल धीरे-धीरे ग्रे या सफेद दिखने लगते हैं। इस प्रक्रिया को वैज्ञानिक भाषा में सेल्युलर एजिंग यानी कोशिकीय वृद्धावस्था कहा जाता है।

जेनेटिक्स निभाता है बड़ी भूमिका
उम्र के अलावा, आनुवंशिक कारण भी समय से पहले बाल सफेद होने में अहम होते हैं। अगर परिवार में माता-पिता या दादा-दादी के बाल कम उम्र में सफेद होने लगे हों, तो अगली पीढ़ी में भी इसकी संभावना बढ़ जाती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि बाल सफेद होने की उम्र काफी हद तक जीन से तय होती है, इसलिए अलग-अलग लोगों में यह समस्या अलग उम्र में दिखाई देती है।

पोषण की कमी भी कारण
विशेषज्ञों के मुताबिक, विटामिन बी12, आयरन, कॉपर और प्रोटीन की कमी से बालों की जड़ों तक जरूरी पोषण नहीं पहुंच पाता। इसका सीधा असर मेलेनिन बनाने वाली कोशिकाओं पर पड़ता है, जिससे बाल समय से पहले सफेद होने लगते हैं। डॉक्टर संतुलित आहार लेने की सलाह देते हैं, जिसमें हरी सब्जियां, फल, दालें, नट्स और डेयरी उत्पाद शामिल हों।

तनाव और गलत जीवनशैली बढ़ा रही समस्या
लंबे समय तक बना रहने वाला मानसिक तनाव हार्मोनल असंतुलन पैदा करता है, जिससे पिगमेंट बनाने वाली कोशिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है। इसके अलावा कम नींद, धूम्रपान, अत्यधिक शराब सेवन और फास्ट फूड पर निर्भरता शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ाती है। इससे कोशिकाएं जल्दी बूढ़ी होने लगती हैं और बालों की सेहत प्रभावित होती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि संतुलित खानपान, नियमित नींद, तनाव प्रबंधन और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर समय से पहले बालों के सफेद होने की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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Author: Deepak Mittal

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