बालोद वन विभाग ने 35 एकड़ अतिक्रमित वनभूमि कराई मुक्त, जनहित में होगा सतत विकास

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वन मंत्री के विजन को साकार करता अभिषेक अग्रवाल का नेतृत्व

बालोद/रायपुर,,राज्य शासन की स्पष्ट मंशा एवं प्रदेश के वन मंत्री के “संरक्षण के साथ संवर्धन” के विजन को धरातल पर उतारते हुए बालोद जिला वन मंडल अधिकारी अभिषेक अग्रवाल के नेतृत्व में बालोद वन विभाग ने एक बड़ी एवं सराहनीय कार्रवाई को अंजाम दिया है।वनमंडल अंतर्गत दल्ली परिक्षेत्र के कंजेली परिसर (कक्ष क्रमांक 55 आर.एफ.) में लगभग 35 एकड़ आरक्षित वनभूमि को अतिक्रमण से पूर्णतः मुक्त कराया गया। यह कार्रवाई पुलिस, प्रशासन एवं संयुक्त वन प्रबंधन समिति के सहयोग से सुनियोजित एवं वैज्ञानिक पद्धति से संपन्न हुई।


वन मंत्री की नीति के अनुरूप त्वरित निर्णय
गत मंगलवार को अतिक्रमण की सूचना मिलते ही विभागीय अधिकारियों द्वारा तत्काल स्थल निरीक्षण किया गया। वन मंत्री के निर्देशानुसार वनभूमि पर अतिक्रमण के प्रति सख्त एवं त्वरित कार्यवाही की नीति के तहत संयुक्त वन प्रबंधन समिति के साथ कार्ययोजना तैयार कर अतिक्रमण के प्रयास को पूरी तरह विफल किया गया।


कानून का कड़ाई से पालन
अतिक्रमणकारियों के विरुद्ध भारतीय वन अधिनियम 1927 के अंतर्गत प्रकरण दर्ज कर कानूनी कार्यवाही प्रारंभ कर दी गई है तथा क्षति वसूली की प्रक्रिया भी सुनिश्चित की जा रही है।
साथ ही, वन मंत्री के स्पष्ट संदेश के अनुरूप कि “लापरवाही किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं है”, जिम्मेदारी तय करते हुए संबंधित बीटगार्ड को निलंबित एवं सहायक परिक्षेत्र अधिकारी को उनके कार्यक्षेत्र से हटाया गया है।


ग्रामीण हित और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ
मुक्त कराई गई वनभूमि पर वन मंत्री के विजन के अनुरूप वनवर्धन, चारागाह विकास एवं सामुदायिक सहभागिता आधारित योजनाएं प्रस्तावित की जा रही हैं, जिससे स्थानीय ग्रामीणों को लाभ मिलेगा और पर्यावरण संतुलन भी सुदृढ़ होगा।

जिला वन मंडल अधिकारी अभिषेक अग्रवाल ने हरिभूमि से कहा—
“प्रदेश के वन मंत्री एवं राज्य शासन का स्पष्ट निर्देश है कि वनभूमि का संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता है। वन विभाग ने समन्वित प्रयासों से 35 एकड़ वनभूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया है। भविष्य में भी शासन की मंशा के अनुरूप वन संरक्षण, जनहित और सतत विकास के लिए कठोर एवं पारदर्शी कार्यवाही जारी रहेगी।


शासन की नीति को मिला मजबूत आधार
यह कार्रवाई वन मंत्री के दूरदर्शी विजन, राज्य शासन की सख्त नीति एवं वन विभाग की प्रतिबद्ध कार्यप्रणाली का सशक्त उदाहरण है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि जिले में वन संरक्षण अब केवल नीतियों तक सीमित नहीं, बल्कि प्रभावी धरातली कार्रवाई बन चुका है।


उन्होंने स्पष्ट कहा कि वन भूमि पर अतिक्रमण किसी भी तरह बर्दाश्त नहीं होगी, चाहे वह कोई भी हो शासन के नियमानुसार जनहित में लोगों को लाभ मिल सके इस तरह के कार्य प्रस्तावित किए जाएंगे,!

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Author: Deepak Mittal

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