धर्मांतरण के आरोपों में फंसे एनजीओ का एफसीआरए लाइसेंस रद्द, गृह मंत्रालय की बड़ी कार्रवाई

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यूपी/नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश में धर्म परिवर्तन के गंभीर आरोपों में घिरे एक एनजीओ के खिलाफ केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) ने सख्त कदम उठाया है। संतकबीर नगर जिले से संचालित गाइडेंस एजुकेशनल वेलफेयर सोसाइटी (GEWS) का एफसीआरए लाइसेंस रद्द कर दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक, यह संस्था शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर विदेशी चंदा प्राप्त कर रही थी, लेकिन जांच में इसे धर्मांतरण को बढ़ावा देने का दोषी पाया गया।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जीईडब्ल्यूएस को नोटिस जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि जब तक संगठन की ओर से वैध दस्तावेज और संतोषजनक स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं किया जाता, तब तक उसका एफसीआरए पंजीकरण रद्द रहेगा। लाइसेंस रद्द होने के बाद अब संस्था न तो विदेशी फंड प्राप्त कर सकेगी और न ही पहले से मिले विदेशी चंदे का उपयोग कर पाएगी।

यह कार्रवाई एफसीआरए अधिनियम, 2010 के तहत की गई है। मंत्रालय की जांच में पिछले पांच वर्षों (लगभग 2020 से 2025) के वित्तीय दस्तावेजों में कई गंभीर उल्लंघन सामने आए हैं। इनमें विदेशी फंड्स का गलत उपयोग, घोषित उद्देश्यों से विचलन और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन शामिल हैं।

गौरतलब है कि जीईडब्ल्यूएस वर्ष 2021 से ही विवादों में घिरी हुई है। आरोप था कि संस्था शिक्षा, स्वास्थ्य और कल्याणकारी योजनाओं की आड़ में गरीब और आदिवासी परिवारों को प्रलोभन देकर ईसाई धर्म में परिवर्तित करवा रही थी। इन्हीं आरोपों के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 2021 में संतकबीर नगर स्थित संस्था के कार्यालय पर छापेमारी की थी। छापे के दौरान फंड्स के दुरुपयोग और दस्तावेजों में हेरफेर से जुड़े कई सबूत मिलने का दावा किया गया था। ईडी ने संस्था के अध्यक्ष सहित अन्य कर्मचारियों से लंबी पूछताछ भी की थी।

इसके बाद गृह मंत्रालय ने जीईडब्ल्यूएस के एफसीआरए नवीनीकरण आवेदन की गहन जांच कराई। जांच में यह सामने आया कि विदेशी चंदे का उपयोग संगठन के घोषित उद्देश्यों—शिक्षा और वेलफेयर—के बजाय अन्य गतिविधियों में किया गया। एमएचए के दिशानिर्देशों के अनुसार, यदि कोई एनजीओ जबरन धर्म परिवर्तन, सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने या राष्ट्रविरोधी व संदिग्ध गतिविधियों में शामिल पाया जाता है, तो उसका एफसीआरए रजिस्ट्रेशन रद्द किया जा सकता है।

सरकारी सूत्रों का कहना है कि यह कार्रवाई केंद्र सरकार की उस नीति का हिस्सा है, जिसके तहत विदेशी फंडिंग और धर्मांतरण से जुड़े मामलों पर सख्त निगरानी रखी जा रही है। उत्तर प्रदेश में एंटी-कन्वर्जन कानून लागू होने के बाद ऐसे मामलों पर विशेष नजर रखी जा रही है। पिछले कुछ वर्षों में इसी तरह के आरोपों में कई अन्य एनजीओ के एफसीआरए लाइसेंस भी रद्द किए जा चुके हैं।

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Author: Deepak Mittal

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