नई दिल्ली: लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की हिरासत को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उनकी पत्नी गीतांजलि जे अंगमो की ओर से दायर याचिका पर अदालत में बहस हुई, जिसमें वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने हिरासत के आधार बताने में हुई देरी को कानून का खुला उल्लंघन बताया। अब इस मामले की अगली सुनवाई 12 जनवरी को होगी।
“आधार समय पर नहीं बताए गए तो हिरासत रद्द होनी चाहिए”
सुप्रीम कोर्ट में सोनम वांगचुक की ओर से पेश होते हुए कपिल सिब्बल ने कहा कि कानून बिल्कुल स्पष्ट है—
अगर हिरासत के सभी आधार समय पर नहीं बताए जाते, तो डिटेंशन ऑर्डर अपने आप अमान्य हो जाता है।
उन्होंने बताया कि सोनम वांगचुक को 29 सितंबर को हिरासत में लिया गया, लेकिन हिरासत के पूरे आधार 28 दिन बाद बताए गए। यही नहीं, जिन चार वीडियो सबूतों के आधार पर कार्रवाई की गई, वे भी उस दिन उपलब्ध नहीं कराए गए।
वीडियो, पेनड्राइव और लैपटॉप… फिर भी अधूरी जानकारी?
कपिल सिब्बल ने कोर्ट को बताया कि
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29 सितंबर को दी गई पेनड्राइव में चार अहम वीडियो नहीं थे
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बाद में सिर्फ वीडियो के लिंक दिए गए
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5 अक्टूबर को एक लैपटॉप दिया गया, लेकिन तब तक भी सभी दस्तावेज पूरे नहीं थे
उन्होंने जोर देकर कहा कि जिन भरोसेमंद दस्तावेजों के आधार पर हिरासत ली गई, अगर वे समय पर उपलब्ध न कराए जाएं, तो हिरासत आदेश रद्द होना तय है—इस पर सुप्रीम कोर्ट के कई फैसले मौजूद हैं।
“यह भाषण गांधीजी जैसा था, सुरक्षा के लिए खतरा नहीं”
सिब्बल ने कोर्ट में सोनम वांगचुक के भाषण का वीडियो दिखाते हुए कहा—
“गांधी जी ने भी चौरी-चौरा कांड के बाद इसी तरह का रास्ता अपनाया था। सोनम वांगचुक के भाषण में ऐसा कुछ भी नहीं है, जो राज्य की सुरक्षा के लिए खतरा बनता हो।”
NSA के तहत प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
संशोधित याचिका में गीतांजलि जे अंगमो ने दलील दी है कि
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हिरासत का आदेश यांत्रिक और जल्दबाजी में पारित किया गया
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राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत जरूरी प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों का पालन नहीं हुआ
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समय पर ठोस आधार न मिलने से सोनम वांगचुक को प्रभावी प्रतिनिधित्व का मौका नहीं मिला
Author: Deepak Mittal










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