शराब घोटाला केस में बड़ा मोड़! चैतन्य बघेल को हाई कोर्ट से जमानत, जेल से बाहर आते ही मचा सियासी भूचाल

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बिलासपुर: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट से जमानत मिल गई है। यह राहत उन्हें प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा दर्ज मामलों में दी गई है।

इससे पहले बिलासपुर हाई कोर्ट ने चैतन्य बघेल की जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिस पर अब कोर्ट ने जमानत मंजूर कर ली है।

जुलाई 2025 में हुई थी गिरफ्तारी

शराब घोटाले में संलिप्तता के आरोपों के बाद ईडी ने 18 जुलाई 2025 को चैतन्य बघेल को गिरफ्तार किया था। उन पर मनी लॉन्ड्रिंग सहित गंभीर आर्थिक अपराधों के आरोप लगाए गए थे। हाल ही में इस मामले में ईडी ने चार्जशीट भी दाखिल की थी, जिसके बाद से जमानत को लेकर सियासी हलकों में लगातार चर्चा तेज थी।

सिंडिकेट का ‘मास्टरमाइंड’ होने का आरोप

जांच एजेंसियों के अनुसार, शराब सिंडिकेट का पूरा कंट्रोल कथित तौर पर चैतन्य बघेल के हाथों में था। आरोप है कि सियासी वर्चस्व के चलते वही पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहे थे।
ईडी का दावा है कि शराब कारोबार से जुड़े पैसे का लेन-देन, हिसाब-किताब और सिंडिकेट के संचालन की रणनीति चैतन्य ही तय करते थे।

200 से 250 करोड़ रुपये के लेन-देन का दावा

मामला सामने आने के समय जांच एजेंसियों ने दावा किया था कि चैतन्य बघेल से जुड़े नेटवर्क के जरिए 200 से 250 करोड़ रुपये की अवैध कमाई हुई। आरोप है कि इस रकम का इस्तेमाल उन्होंने रियल एस्टेट कारोबार में किया।
इस शराब घोटाले की जांच के दौरान कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और राजनेताओं की भी गिरफ्तारी हो चुकी है।

जमानत के बाद बढ़े सियासी सवाल

हाई कोर्ट से जमानत मिलने के बाद जहां कांग्रेस खेमे में राहत की सांस ली जा रही है, वहीं विपक्ष इसे लेकर हमलावर हो सकता है। शराब घोटाले से जुड़ा यह मामला पहले ही छत्तीसगढ़ की राजनीति में उबाल ला चुका है और अब चैतन्य बघेल की रिहाई के बाद राजनीतिक तापमान और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

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Author: Deepak Mittal

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