न्यू ईयर की रात ‘हाई-प्रोफाइल’ होटल बना अखाड़ा! Courtyard by Marriott में कारोबारियों की बेल्ट-घूंसे चले

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रायपुर: नए साल के जश्न की आड़ में राजधानी रायपुर में हाई-प्रोफाइल न्यू ईयर पार्टी उस वक्त शर्मनाक मंजर में बदल गई, जब लभांडी स्थित होटल कोर्टयार्ड बाय मैरियट में दो गुटों के बीच जमकर मारपीट हो गई। बीती रात पार्टी जैसे-जैसे आगे बढ़ी, शराब का नशा सिर चढ़ता गया और मामूली विवाद ने देखते ही देखते हिंसक रूप ले लिया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पहले तो लात-घूंसे चले, फिर मामला इतना बिगड़ा कि कारोबारियों ने बेल्ट उतारकर एक-दूसरे को पीटना शुरू कर दिया। दो गुटों में हुई इस मारपीट के दौरान उनके साथ आई महिलाएं बीच-बचाव करती नजर आईं। करीब एक घंटे से ज्यादा समय तक होटल में जूतम-पैजार का माहौल बना रहा, जिसे बाद में होटल मैनेजर और अन्य लोगों ने किसी तरह शांत कराया।

इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि दोनों पक्षों ने थाने में कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई। पुलिस तक मामला नहीं पहुंचने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

न्यू ईयर की महफिल, शराब-शबाब और करोड़ों की कमाई

पुलिस प्रशासन की सख्ती के बावजूद राजधानी के बड़े होटलों, फार्महाउसों और क्लबों में न्यू ईयर की रात जमकर शराब और शबाब का जश्न देखने को मिला। आयोजकों ने विदेशी शराब, विदेशी डांसर्स और लाइव आर्केस्ट्रा तक का इंतजाम किया।
पूरी रात चौक-चौराहों से लेकर पॉश कॉलोनियों तक शराब की नदियां बहती रहीं। विदेशी बालाओं के हाथों जाम छलकते रहे और फरमाइशी गीतों पर लोग झूमते नजर आए। सेल्फी जोन पर भीड़ लगी रही और पार्टी फीस वसूलने की होड़ मची रही।

हरियाणा से लाई गई 300 पेटी शराब, आबकारी की बड़ी कार्रवाई

न्यू ईयर पार्टियों में खपाने के लिए हरियाणा से बड़ी मात्रा में शराब मंगाई गई थी। हालांकि जश्न से पहले ही आबकारी विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 300 पेटी ब्लैक डॉग अंग्रेजी शराब जब्त कर ली, जिसकी कीमत करीब 40 लाख रुपए बताई जा रही है।

यह कार्रवाई अंबिकापुर के कांतिप्रकाशपुर इलाके में की गई। शराब को सड़क मार्ग से लाकर एक किराए के मकान में छिपाकर रखा गया था। सहायक जिला आबकारी अधिकारी रंजीत गुप्ता ने वाहन समेत शराब जब्त कर आरोपी मौरभ सिंह को गिरफ्तार किया। आरोपी पूर्व में भी शराब तस्करी के मामले में जेल जा चुका है।

न्यू ईयर की चमक-धमक के पीछे छुपा यह हिंसा, नशा और अवैध कारोबार का चेहरा अब कई सवाल खड़े कर रहा है—क्या हाई-प्रोफाइल पार्टियों पर वाकई लगाम लग पाएगी, या हर साल जश्न इसी तरह बदनुमा दाग छोड़ता रहेगा?

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Author: Deepak Mittal

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