नई दिल्ली: देश में यूरिया की कमी, डीलरों की मनमानी और सब्सिडी वाले उर्वरक के अवैध डायवर्जन जैसी शिकायतों के बीच केंद्र सरकार ने उर्वरक वितरण प्रणाली में बड़े बदलाव की योजना बनाई है। अब किसानों को उनकी खेती योग्य जमीन के अनुसार ही यूरिया मिलेगा। यह नई व्यवस्था मार्च 2026 से लागू होगी।
बदलाव क्यों जरूरी:
सरकार के अनुसार, देश में वास्तविक यूरिया की कमी नहीं है, लेकिन जमीनी स्तर पर हो रही हेराफेरी और अवैध भंडारण के कारण समस्या बढ़ी है। कई किसान अपनी जरूरत से अधिक यूरिया खरीद लेते हैं, जिसका कुछ हिस्सा गैर-कृषि उपयोग में चला जाता है। इससे वास्तविक जरूरतमंद किसानों तक पर्याप्त उर्वरक नहीं पहुंच पाता।
किसानों के लिए बदलाव:
केंद्र सरकार एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू करेगी, जिसमें यूरिया की खरीद सीधे किसान की भूमि-होल्डिंग से जोड़ी जाएगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि किसान अपनी वास्तविक आवश्यकता के अनुसार ही उर्वरक खरीद रहे हैं। केंद्रीय उर्वरक मंत्री जे.पी. नड्डा ने कहा कि यह कदम सब्सिडी वाले यूरिया के दुरुपयोग को रोकने के लिए बेहद जरूरी है।
डायवर्जन रोकने के लिए कड़ा कदम:
सरकार ने पिछले सात महीनों में अवैध यूरिया के उपयोग पर रोक लगाने के लिए कार्रवाई तेज की है। अब तक 5,371 उर्वरक कंपनियों और डीलरों के लाइसेंस रद्द किए जा चुके हैं और 649 एफआईआर दर्ज की गई हैं।
उद्योग और फिक्स्ड कॉस्ट में बदलाव:
उर्वरक सचिव रजत मिश्रा ने बताया कि 25 साल से लंबित गैस-आधारित यूरिया संयंत्रों के फिक्स्ड कॉस्ट में संशोधन किया जाएगा। इसमें वेतन, मेंटेनेंस, कार्यशील पूंजी और उत्पादन खर्च शामिल हैं। यह बदलाव साल के अंत तक लागू करने पर विचार किया जा रहा है।
FAI की मांगें:
फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने यूरिया, डीएपी और पोटाश के असंतुलित उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता पर प्रभाव की चिंता जताई और नीति स्तर पर सुधार की मांग की। उन्होंने सब्सिडी में पारदर्शिता, GST इनपुट टैक्स क्रेडिट रिफंड में आसान प्रक्रिया और नए उत्पादों के लॉन्च की सरल प्रक्रिया को भी शामिल किया।
मार्च 2026 से बदल जाएगा खेल:
नई नीति लागू होने के बाद:
-
किसान केवल जरूरत के अनुसार यूरिया खरीदेंगे
-
अवैध डायवर्जन और भंडारण लगभग खत्म हो जाएगा
-
सब्सिडी का दुरुपयोग रुकेगा
-
मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार होगा
-
उद्योग को स्थिरता मिलेगी
सरकार ने इसे चरणबद्ध तरीके से मार्च 2026 तक लागू करने का लक्ष्य रखा है, जिससे कृषि क्षेत्र में किसानों और उद्योग दोनों को बड़ी राहत मिलेगी।
Author: Deepak Mittal










Total Users : 8154874
Total views : 8174937