सुकमा: कभी लाल आतंक की गूंज से दहलने वाला गोगुंडा पहाड़ अब बदलते हालात का प्रतीक बन गया है। चार दशकों तक माओवादियों के कब्जे में रहे इस क्षेत्र में पहली बार सड़क निर्माण कार्य शुरू हुआ है। यह सड़क सिर्फ पत्थर और मिट्टी का मार्ग नहीं, बल्कि सरकार की पहुँच और सुरक्षा बलों की स्थायी मौजूदगी का प्रतीक है।
जिले की पुलिस और CRPF 74वीं बटालियन की मौजूदगी में यह सड़क बनाई जा रही है, जो पहले असंभव मानी जाती थी। गोगुंडा कभी माओवादियों का सबसे मजबूत कमांड जोन था, जहां आम लोगों का आना-जाना पूरी तरह प्रतिबंधित था।
घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों में नक्सलियों ने हथियार सप्लाई, एंबुश प्लानिंग और कैडर ट्रेनिंग संचालित की थी। आज यह क्षेत्र सुरक्षा बलों की सक्रिय उपस्थिति और विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बन गया है।
Author: Deepak Mittal









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